UAPA यानी गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम के तहत 2019 तक बीते 5 सालों में जितने भी लोगों को गिरफ्तार किया गया, उनमें से सिर्फ 2% को ही दोषी ठहराया जा सका. TOI ने NCRB के डेटा के आधार पर अपनी रिपोर्ट में ये बात कही है. रिपोर्ट में कहा गया है कि UAPA के तहत आतंकवादी धाराओं में अरेस्ट किए गए 7840 लोगों में से सिर्फ 155 को ट्रायल के बाद कोर्ट ने अपराधी ठहराया.
UAPA के दुरुपयोग की लगातार खबरें आती रहती हैं, हाल ही में कुछ उच्च न्यायालयों ने भी इसके दुरुपयोग की बातें कही हैं. Delhi Riots Case में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इसके दुरुपयोग पर सख्त टिप्पणियां की थीं और हाल के दिल्ली दंगों के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्र नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ इकबाल पर लगाए गई UAPA की धाराओं को गलत बताते हुए उन्हें बेल दे दी थी. कोर्ट ने कहा कि इन तीनों पर प्रथम दृष्टया UAPA के तहत केस नहीं बनता.