इशरत जहां 'फर्जी' एनकाउंटर केस (Isharat Jahan case) में अहमदाबाद की स्पेशल CBI कोर्ट ने कथित मुठभेड़ में मारी गईं इशरत जहां को 'लश्कर का आतंकी' बताया है, और 'फर्जी' मुठभेड़ (encounter) मामले के आरोपी बाकी तीन पुलिस अफसरों को ये कहते हुए बरी (bail) कर दिया कि वो अपना काम कर रहे थे. इन पुलिस अफसरों (Police officer) के नाम हैं गिरीश सिंघल, तरुण बारोट और अनाजू चौधरी. अहमदाबाद (Ahmedabad) की स्पेशल अदालत ने खुफिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उसे नकारा नहीं जा सकता, और इन अफसरों ने उसके आधार पर ही काम किया. आपको बता दें कि अब इशरत जहां के कथित फर्जी एनकाउंटर मामले में सभी आरोपी पुलिसवाले छूट गए हैं. इससे पहले 20 मार्च को CBI ने अदालत को बताया था कि गुजरात सरकार ने तीनों आरोपी पुलिसवालों के खिलाफ अभियोग चलाने की मंजूरी नहीं दी है.
15 जून, 2004 को मुंब्रा की रहने वाली 19 साल की इशरत जहां को गुजरात पुलिस ने मार गिराया था. उस कथित मुठभेड़ में इशरत के साथी जावेद शेख उर्फ प्रनेश पिल्लई, अमजद और जीशान भी मारे गए थे. पुलिस का दावा था कि मुठभेड़ में मारे गए चारों लोग आतंकवादी थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की हत्या करने की योजना बना रहे थे. हालांकि, हाईकोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच टीम इस निष्कर्ष पर पहुंची थी की मुठभेड़ फर्जी थी, जिसके बाद CBI ने कई पुलिस वालों के खिलाफ मामला दर्ज किया था.