हाइलाइट्स

यूपी के गाजीपुर में हुआ था अब्दुल हमीद का जन्म

अब्दुल हमीद 4 ग्रेनेडियर्स में तैनात थे

1965 के जंग में पाकिस्तानी सेना के मंसूबे को ध्वस्त किया

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1 जुलाई 1933 को ही मां भारती के उस रणबांकुरे का जन्म हुआ था जिसने 1965 की जंग में पाकिस्तान के इरादे को मिट्टी में मिला था... आइए जानते हैं मरणोपरांत परमवीर पुरस्कार से सम्मानित अब्दुल हमीद के बारे में

कंपनी क्वार्टरमास्टर हवलदार अब्दुल हमीद ( Abdul Hamid ), पीवीसी (1 जुलाई 1933 - 10 सितंबर 1965), एक भारतीय सेना के सैनिक थे. हमीद ने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान 6 पैंटन टैंकों को अकेले उड़ा दिया था. युद्ध में अपने अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र ( Param Vir Chakra ) प्रदान किया गया था...

हामिद दिसंबर 1954 में सेना में शामिल हुए थे और ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट की चौथी बटालियन में तैनात थे. भारत-चीन युद्ध 1962 के दौरान, उनकी बटालियन ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के खिलाफ नमका चू की लड़ाई में हिस्सा लिया. 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान, 4 ग्रेनेडियर्स बटालियन को खेमकरन-भिखीविंड लाइन पर चीमा गांव के सामने एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी.

9-10 सितंबर 1965 को असल उत्तर की लड़ाई में, हामिद ने 6 पाकिस्तानी टैंकों को नष्ट कर दिया और नौवें टैंक को नष्ट करते हुए शहीद हो गए थे... आइए वीडियो में जानते अब्दुल हमीद के बारे में

1965 का भारत-पाक युद्ध

1 जुलाई 1933 को यूपी के गाजीपुर जिले के धामूपुर गांव में जन्म हुआ था अब्दुल हमीद का... पाकिस्तान ने जब ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम को शुरू किया था, तो उसका पहला लक्ष्य पहले अखनूर और फिर जम्मू पर कब्जे का था, ताकि जम्मू के पास छंब जुरियन सेक्ट से जम्मू व कश्मीर का संपर्क काटा जा सके...

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1 सितंबर 1965 को भारत पाक जंग की शुरुआत हो चुकी थी.. पाकिस्तान ने अमेरिका के घातक पैंटन टैंक्स के बूते इस जंग को जीतने का मंसूबा पाल रखा था. जंग में पाकिस्तान की आक्रामक कार्रवाई की शुरुआत से सेना के रणनीतिकारों को आने वाले संकट की भनक लग चुकी थी. पंजाब में 4 ग्रेनेडियर्स को पंजाब में कुछ आरसीएल गन देकर सेक्ट में किसी भी जंग के हालात से निपटने के लिए तैयार कर दिया गया था...

यहां दुश्मन के टैंक हमले की आशंका ज्यादा थी... इसलिए टैंक भेदी हथियारों को प्राथमिकता दी गई थी... इन तोपों की गोली दागने की स्पीड 530 मीटर प्रति सेकेंड थी... लेकिन इनके सामने थे पाकिस्तान के घातक 48 ए 5 टैंक... जिनपर 105 मिलीमीटर की तोप थी और इनकी गोले दागने की स्पीड 1000 मीटर प्रति सेकेंड थी...

1965 युद्ध में 4 ग्रेनेडियर्स की चुनौती

4 ग्रेनेडियर्स की मुश्किल ये थी कि पिछले 3 साल में इनकी हथियार इस्तेमाल की ट्रेनिंग भी न के बराबर हुई थी... हालांकि बटालियन में कुछ ऐसे नॉन कमीशंड ऑफिसर थे जिनके पास इन्फैंट्री स्कूल में या तो ट्रेनर या ट्रेनी के तौर पर हथियारों के इस्तेमाल का कुछ अनुभव था... कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद भी इन्हीं में से एक थे...

पाकिस्तानी हमले को निश्चित जानकर 7 8 सितंबर की रात यह टुकड़ी पंजाब के खेमकरन सेक्टर की ओर बढ़ी... गन्ने की फसल खेतों में खड़ी थी... ये खेत खुद को बचाने और दुश्मन पर अचानक हमला करने के लिए सही जगह साबित हो सकते थे... 8 सितंबर को तड़के बटालियन ने वहां पहुंचकर खेतों के बीचोंबीच खाई खोदकर मोर्चेबंदी शुरू कर दी...

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8 सितंबर को भारत में दाखिल हुए पाकिस्तानी टैंक

8 सितंबर 1965 की सुबह साढ़े 7 बजे दूर से दुश्मन टैंकों की गड़गड़ाहट सुनाई दी... 9 बजे तक टैंकों का जत्था सड़क पर आता दिखाई देने लगा... अमेरिका के घातक पैंटन टैंक भी इस जत्थे में शामिल थे... इन टैंकों की दिशा उन्हीं गन्ने के खेतों की ओर थी, जहां ग्रेनेडियर्स बटालियन छिपी थी...

ग्रेनेडियर्स खामोशी से टैंकों के नजदीक आने का इंतजार कर रहे थे.. अचूक निशाने के लिए जरूरी था कि टैंकों को और पास आने दिया जाए...

जत्थे के आगे का टैंक जब सिर्फ 50 60 गज की दूरी पर आ गया तो हवलदार अब्दुल हमीद ने अपनी ऐंटी टैंक गन से उसपर हमला कर दिया और टैंक को वहीं ढेर कर दिया... पीछे आ रहे दो टैंकों पर सवार सैनिक पहले टैंक का ऐसा हाल देखकर टैंक छोड़कर भाग खड़े हुए...

1965 युद्ध में अब्दुल हमीद की बहादुरी

अचानक हमले से घबराया दुश्मन संभला और तकरीबन दो घंटे में उसने जवानों की दो टुकड़ियों के साथ बड़ा हमला किया... अब्दुल हमीद ने इस बीच एक और टैंक को धराशायी कर दिया और फिर से पिछले दोनों टैंकों के जवान टैंक छोड़कर ही भाग गए...

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अब तक हमीद 2 पैंटन टैंकों को ध्वस्त कर चुके थे और दुश्मन 4 दूसरे पैंटन टैंकों को पीछे छोड़कर भाग चुका था... इतनी देर में फौज की इंजीनियरों ने टैंकों के रास्ते में कुछ बारूदी सुरंगे भी बिछा दीं...

पाकिस्तानी सेबरजेट विमानों की हमला

9 सितंबर 1965 की सुबह 9 बजे पाकिस्तानी एयरफोर्स के 4 सेबरजेट विमानों ने ग्रेनेडियर्स के ठिकानों पर हवाई हमला किया और 9:30 बजे दुश्मन की जमीनी टुकड़ी ने अगला हमला बोल दिया... इस हमले के बाद पाक फौज ने एक और हमला साढ़े 11 बजे और फिर अगला ढाई बजे किया... लेकिन अब्दुल हमीद के हौसले वे नहीं तोड़ सके... हमीद ने दो और टैंकों को उड़ा दिया और कुछ टैंकों के परखच्चे बारूदी सुरंग की चपेट में आकर उड़ गए...

9 सितंबर की शाम तक अब्दुल हमीद 4 पैंटन टैंकों को ध्वस्त कर चुके थे... जबकि बटालियन कुल 13 टैंक उड़ा चुकी थी.. कुछ टैंक बारूदी सुरंगों के बीच ही छूट गए थे. ग्रेनेडियर्स की मदद को आगे आई शर्मन स्क्वाड्रन को वापस लौटना पड़ा... क्योंकि उनके हथियार पैंटन टैंकों के आगे बेकार थे... सेंचुरियन टैंक भी वापस लौट गए थे...

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ग्रेनेडियर्स को मालूम था कि बिना किसी अतिरिक्त मदद के उनको दुश्मन की पूरी ब्रिगेड का सामना करना है, बावजूद इसके उनके हौसले में रत्ती भर का फर्क नहीं आया था... 10 सितंबर की सुबह साढ़े 8 बजे टैंकों के अगले जत्थे ने भयानक गोलीबारी करते हुए बटालियन पर हमला बोला... टैंकों को बिना प्रतिरोध आगे बढ़ने दिया गया... और जैसे ही टैंक तोप के करीब पहुंच में आए,,, अब्दुल हमीद ने फिर अपनी आर सी एल गन का मुंह खोला और ठिकाना बदलते हुए एक और टैंक को उड़ा दिया..

अब्दुल हमीद ने 6 टैंक उड़ा दिए

दुश्मन ने भारी हथियार के साथ अगला हमला बोला और अब्दुल हमीद ने इस बार भी उनके एक टैंक को निशाना बना डाला... अब तक वे 6 टैंक धूल में मिला चुके थे... दुश्मन की गोलीबारी खत्म नहीं हो पा रही थी... आर सी एल गन खुली छत वाली जीपों पर लगी थी इसलिए इनके गोलियों के चपेट में आने का खतरा ज्यादा था...

अब्दुल हमीद ने यही सोचकर सैनिकों को अपनी गन की सुरक्षा से हटाकर दूसरे ठिकाने पर ले जाने की कोशिश की... इस वजह से हमीद और दुश्मन के टैंक आमने सामने आ गए... परस्पर गोलीबारी में अब्दुल हमीद शहीद हो गए ... 4 ग्रेनेडियर्स के आंकड़ों के मुताबिक दुश्मन का टैंक भी वहीं ध्वस्त हो गया...

हमीद शहीद तो हुए लेकिन उनकी हिम्मत के बूते ही बाद में पाकिस्तान की पहली आर्मर डिवीजन की आर्टिलरी ब्रिगेड के कमांडर ब्रिगेडियर ए आर शम्मी सहित कई दूसरे अफसरों को भी युद्ध के मैदान में ढेर कर दिया गया... इनके कब्जे से मिले कागजात से ये साबित हुआ कि पाकिस्तानी सेना का इरादा हरिके पुल और अमृतसर तक कब्जा कर लेने का था... लेकिन इन इरादों को 4 ग्रेनेडियर्स ने नेस्तनाबूद कर दिया था, जिसमें सबसे बड़ी भूमिका अब्दुल हमीद की थी...

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असल उत्तर की लड़ाई में जिस तरह वीर अब्‍दुल हमीद ने रिक्‍वायललेस गन से पैटन टैंको को ध्वस्त किया, वह अमेरिका के लिए भी अबूझ पहेली बन गई. जंग के बाद अमेरिका को अजेय और शक्तिशाली माने जाने वाले पैटन टैंक की समीक्षा करनी पड़ी.

अब्दुल हमीद को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया और बटालियन को 'असल उत्तर' की युद्ध उपाधि दी गई....

चलते चलते आज की दूसरी घटनाओं पर नजर डाल लेते हैं

1862: कलकत्ता हाई कोर्ट ( Calcutta High Court ) का उद्घाटन में हुआ.

1996: ऑस्ट्रेलिया के नॉर्थ प्रोविंस में स्वेच्छा मृत्यु कानून ( voluntary death law ) विश्व में पहली बार लागू हुआ

1879: भारत में पोस्टकार्ड ( Postcard in India ) की शुरुआत हुई

1927: पूर्व प्रधानमंत्री चन्द्रशेखर सिंह ( Former Prime MInister Chandra Shekhar Singh ) का जन्म हुआ

1973: यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ( Uttar Pradesh Former Chief Minister Akhilesh Yadav Birthday ) का जन्म हुआ

(इस आर्टिकल के लिए रिसर्च मुकेश तिवारी @MukeshReads ने किया है)

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