अच्छा सोचिये ज़रा, एक अंडे को आप कितने अलग अलग तरीकों से खा सकते हैं.... स्क्रैम्बल्ड, बॉइल्ड, पोच्ड, या फ्राइड हर कोई अपने टेस्ट और पसंद के हिसाब से अंडे की डिश बना कर खा सकता है.
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अंडे का टेस्ट हर डिश में अलग कैसे हो जाता है?
अब आप कहेंगे उस डिश में पड़ने वाले मसालों की वजह से...लेकिन मसाले, दूध और चीज़ के अलावा भी एक चीज़ है जिसकी वजह से अंडे का टेस्ट हर डिश में अलग आता है और वो है 'फ़ूड साइंस'. फ़ूड साइंस की वजह से हर डिश में अंडे का स्वाद इतना अलग होता है..
चलिए आपको भी समझाते हैं ये अंडे का फंडा.
दरअसल अंडे का टेस्ट बहुत सारी चीज़ों पर निर्भर करता है जैसे आप अपनी डिश के लिए एग वाईट का इस्तेमाल कर रहे हैं या एग यॉक का, इसके अलावा आप अंडा किस तरह से फैंट रहे हैं और आप किस तरह से उसे पका रहे हैं. अगर आप पूरा अंडा एक साथ फैंट रहे हैं तो एग यॉक की वजह से आपकी डिश का टेस्ट थोड़ा ज़्यादा अच्छा होगा जबकि सिर्फ एग वाइट का इस्तेमाल टेस्ट को थोड़ा कम कर सकता है.
अंडों पर हीट लगने से उनमें मौजूद प्रोटीन वाटर मॉलिक्यूल्स के साथ मिलता है जिसके कारण नए प्रोटीन बॉन्ड्स बनते हैं. प्रोटीन के अलावा एग यॉक फैट से भी भरपूर होता है जिसकी वजह से इसका स्वाद काफी अलग आता है और ये पकने के बाद भी काफी सॉफ्ट रहता है.
कई शेफ अंडे को फैंटते समय उसमें मक्खन या एक्स्ट्रा यॉक डालने की सलाह देते हैं ताकि उसका स्वाद बेहतर बन सके.
इसके अलावा जो कारण फ्राइड एग और ऑमलेट के स्वाद को इतना अलग बनाता वो है एक कैमिकल प्रोसेस जिसे कहा जाता है मैलार्ड रिएक्शन. प्रोटीन और ग्लूकोस के आपस में मिलने की प्रोसेस को कहा जाता है मैलार्ड रिएक्शन. इसकी वजह से अंडे में हल्का भूरा रंग और नटी फ्लेवर आता है.
खाने के टेक्सचर का भी स्वाद पर काफी असर पड़ता है. जैसे एक सिल्की स्मूथ स्क्रैम्बल्ड एग का स्वाद बॉइल्ड एग और पोच्ड एग से अलग होगा क्यूंकि तीनों का टेक्सचर एक दूसरे से बहुत अलग है जिस वजह से स्वाद में भी काफी अंतर होता है.