टोक्यो ओलंपिक (Tokyo Olympics) मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) ने इतिहास रच दिया. उन्होंने वेटलिफ्टिंग (Weightlifting) की 49 किलोग्राम कैटेगरी में सिल्वर जीत कर भारत को पहला मेडल दिला दिया. इसके साथ ही मीराबाई चानू ने ओलिंपिक के महिला वेटलिफ्टिंग में 21 साल के पदक को सूखे को खत्म किया है. सिखोम मीराबाई चानू (Saikhom Mirabai Chanu) मणिपुर (Manipur) के इंफाल ईस्ट (Imphal East) की रहने वाली हैं. चानू का जन्म 8 अगस्त 1994 को इम्फाल में हुआ था. उनके गांव में ट्रेनिंग सेंटर नहीं था, वह सुबह उठकर अभ्यास के लिए 22 किलोमीटर की सफर तय करती थीं और आकर स्कूल के लिए भी तैयार होती थीं. 4 फ़ुट 11 इंच की मीराबाई चानू को देखकर अंदाज़ा लगाना भी मुश्किल है कि देखने में नन्ही सी मीरा बड़े बड़ों के छक्के छुड़ा सकती हैं. रियो ओलिंपिक में उन्हें ज्यादा सफलता हाथ नहीं लगी थी और इसके कारण वह डिप्रेशन में भी चली गई थीं. उन्होंने खेल को अलविदा कहने का भी मन बना लिया था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और जबरदस्त वापसी करते हुए आज इस मुकाम पर पहुंची हैं कि इतिहास रच दिया.
मीराबाई की कामयाबी से जुड़ी बड़ी बातें:
टोक्यो ओलिंपिक्स में भारत के लिए मेडल जीतने वाली पहली एथलीट
कर्नम मल्लेश्वरी के बाद महिला वेटलिफ्टिंग में मेडल जीतने वाली दूसरी भारतीय एथलीट
साल 2014 में ग्लासगो में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में सिल्वर मेडल जीता
2017 में हुई वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में 48 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड मेडल
2018 में कॉमन वेल्थ गेम्स में भी चानू ने गोल्ड मेडल अपने नाम किया
अप्रैल 2021 में 49 किग्रा क्लीन एंड जर्क में 119 Kg भार उठाकर नया विश्व रिकॉर्ड बनाया
2018 में भारत के सर्वोच्च नागरिक खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न से सम्मानित
चानू को 2018 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया
मीराबाई चानू ओलिंपिक्स रिंग के डिजाइन की ईयररिंग पहनती हैं
ये ईयररिंग रियो ओलिंपिक के बाद उनकी मम्मी ने उन्हें दी थी