सुप्रीम कोर्ट ने वरिष्ठ पत्रकार विनोद दुआ (Senior Journalist Vinod Dua) के खिलाफ राजद्रोह का मामला (Sedition case ) खारिज कर दिया है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि हर जर्नलिस्ट को राजद्रोह जैसे मामलों में केदारनाथ केस के फैसले (Kedar Nath Singh judgment ) के अंतर्गत संरक्षण का अधिकार है. सर्वोच्च अदालत ने साल 1962 में केदारनाथ केस में दिए अपने ही आदेश का हवाला देते हुए विनोद दुआ पर किसी तरह की कार्रवाई न करने का आदेश दिया है.
बता दें कि 1962 में केदारनाथ बनाम बिहार राज्य केस में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि सरकार की ओर से किए गए कार्यों को लेकर किसी पत्रकार द्वारा कड़े शब्दों में असहमति जताना राजद्रोह नहीं (Dissenting is not sedition) है. कोर्ट ने ये भी कहा कि विनोद दुआ को इस मामले के संबंध में हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा पूछे गए किसी सवाल का जवाब देने की आवश्यकता नहीं है. बता दें कि पिछले साल 6 मई को हिमाचल प्रदेश के BJP नेता श्याम ने शिमला जिले में विनोद दुआ के खिलाफ राजद्रोह का केस दर्ज कराया था. श्याम ने आरोप लगाया था कि दुआ ने अपने यूट्यूब कार्यक्रम में प्रधानमंत्री के बारे में गलत बातें कहीं थीं. FIR में उन पर फर्जी खबरें फैलाने और लोगों को भड़काने का आरोप लगाया गया था.