सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को रद्द कर दिया है जिसमें अदालत ने दुष्कर्म के एक आरोपी को इस शर्त पर जमानत दे दी थी कि वो पीड़िता से राखी बंधवाए. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पिछले साल 30 जुलाई को ये फैसला दिया था और इस पर उस दौरान काफी हंगामा मचा था. इस फैसले के खिलाफ नौ महिला वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर आदेश को चुनौती दी थी और मांग की थी कि सर्वोच्च अदालत की तरफ से अन्य अदालतों को आदेश दिया जाए कि वे यौन उत्पीड़न के मामले में इस तरह के आदेश ना दें. मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश की आलोचना करते हुए अटार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि जजों को जेंडर सेंस्टाइजेशन सिखाया जाना चाहिए ताकि वो ऐसे संवेदनशील मामलों में इस प्रकार के फैसले ना दें.