भारतीय रेल (Indian railway) इन दिनों हाइड्रोजन ईंधन यानी ग्रीन फ्यूल (Hydrogen fuel/ green fuel) पर चलने की तैयारी कर रही है. यही कारण है कि भारतीय रेल ने उत्तर रेलवे के 89 किलोमीटर लंबे सोनीपत-जींद (Sonipat-Jind) मार्ग पर डीजल इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (DEMU) पर रेट्रोफिटिंग करके हाइड्रोजन ईंधन सेल आधारित प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल को बोलियां आमंत्रित की हैं. इसके जरिये भारतीय रेल यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि क्या मौजूदा डीजल से चलने वाली ट्रेनों को हाइड्रोजन का इस्तेमाल करने के लिए रेट्रोफिट किया जा सकता है. जर्मनी और पोलैंड के बाद भारत विश्व का तीसरा देश होगा जहां ग्रीन एनर्जी का प्रयोग शुरू किया जा रहा है.
रेल मंत्रालय के बयान में कहा गया कि डीजल से चलने वाले डेमू की रेट्रोफिटिंग और इसे हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाले ट्रेन सेट में बदलने से न केवल सालाना 2.3 करोड़ रुपये की बचत होगी, बल्कि प्रतिवर्ष 11.12 किलो टन के कार्बन उत्सर्जन को भी कम किया जा सकेगा.