राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अपने 2010 के उस आदेश को वापस ले लिया जिसके मुताबिक उन्हीं हिरासत में हुई मौतों की जांच हो सकेगी जिसमें षडयंत्र की आशंका हो. रिपोर्ट्स के मुताबिक आयोग ने अपने फैसले पर फिर से विचार करते हुए कहा है कि हिरासत में होने वाली सभी मौतों में जांच की जाएगी. बता दें कि साल 2005 में कानून में धारा 176 (1 ए) डाली गई थी, जिसके मुताबिक हिरासत में मौत, बलात्कार और लापता होने के मामलों में न्यायिक मजिस्ट्रेट या मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट द्वारा जांच को अनिवार्य किया गया था.