Independence Day 2021: कुछ ऐसे ब्रांड हैं जिनके नाम हम कई दशकों से सुनते आ रहे हैं और सिर्फ हम ही नहीं बल्कि हमारे दादा परदादा भी इन ब्रांड्स और प्रॉडक्ट्स का इस्तेमाल करते आ रहे हैं.
इनमें से कुछ ब्रांड्स ऐसे हैं जो स्वदेशी मूवमेंट के दौरान अस्तित्व में आये और कुछ आज़ादी के बाद लॉन्च हुए. पिछले 75 सालों या उस से भी पहले से ये ब्रांड्स लोगों के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं. चलिए आपको बताते हैं ऐसे ही कुछ ब्रांड्स के बारे में जो भारत के आज़ाद होने से पहले से अस्तित्व में हैं.
HALDIRAM'S
हल्दीराम की भुजिया किसने नहीं खाई होगी. लेकिन क्या आप जानते हैं लगभग हर किसी की फेवरेट बन चुकी भुजिया बनाने वाली ब्रांड haldirams की शुरुआत कैसे हुई? 1937 में राजस्थान के बीकानेर में गंगा भीषन अग्रवाल ने एक छोटी सी नमकीन की दुकान की शुरुआत की. उनकी मां उन्हें प्यार से हल्दीराम बुलाती थीं इसलिए उनके नाम पर ही इस दुकान का नाम रखा गया था हल्दीराम. 1946 में उन्होंने बीकानेरी भुजिया बेचना शुरू किया और आज ये ब्रांड घर घर में एक जाना पहचाना नाम बन गई है.
AMUL
अपनी टैग लाइन 'द टेस्ट ऑफ़ इंडिया' के लिए मशहूर देश की जानी मानी डेयरी प्रोडक्ट ब्रांड अमूल आज हर भारतीय घर का हिस्सा है. अमूल की शुरुआत 1946 में हुई थी. दरअसल 1940 के दशक में गुजरात में दुग्ध उत्पादक किसानों का व्यापारी खूब शोषण करते थे, जिसके चलते किसानों की दशा सुधारने के लिए प्रयास किये जाने लगे और उन्हीं प्रयासों का एक नतीजा था अमूल. 1955 में अमूल गर्ल कैंपेन लॉन्च किया गया जिसकी आज अपनी एक अलग पहचान है.
ROOH AFZA (HAMDARD)
बच्चों से लेकर बड़ों तक का फेवरेट रह चुके रूह आफ्ज़ा की शुरुआत 1906 में गाज़ियाबाद में हुई. इसे यूनानी हर्बल चिकित्सा के एक हकीम हाफ़िज़ अब्दुल मजीद ने दवा के रूप में इज़ाद किया था जो धीरे धीरे एक ड्रिंक में बदल गया. दूध के साथ हो, फालूदा के साथ हो या पानी के साथ इस रिफ्रेशिंग ड्रिंक का स्वाद हम सबने कभी न कभी ज़रूर चखा है. रमज़ान के दौरान, खासकर इफ्तारी के समय पिए जाने वाले इस ड्रिंक से लगभग हर किसी की यादें जुड़ी हैं.
OLD MONK (MOHAN MEAKIN)
ओल्ड मॉन्क रम, इस नाम के कितने फैंस हैं ये बता पाना बहुत मुश्किल होगा. वैसे तो इस कंपनी की नींव 1855 में हिमाचल प्रदेश के कसौली में एक बिज़नेसमेन एडवर्ड अब्राहम डायर ने डायर ब्रुअरीज के नाम से रखी थी. इसका मकसद ब्रिटिश फ़ौज को सस्ती बियर सप्लाई करना था. 1949 में नरेंद्र नाथ मोहन ने इसे खरीद लिया और इसका नाम बदल कर मोहन माकिन कर दिया गया. 1954 में उनके बेटे वेद रतन मोहन ने ओल्ड मॉन्क रम लॉन्च की.
PARLE G
PARLE G, जिसे किसी भी इंट्रोडक्शन की ज़रूरत नहीं है. 1939 में लॉन्च होने के बाद से ही ये बिस्किट हर घर में अपनी बना चुके हैं. 1980 तक ये 'पार्ले ग्लूको' बिस्कुट के नाम से आते थे बाद में इसका नाम बदल कर पार्ले- जी कर दिया गया. ये बिस्कुट तो लोगों के बीच पहचान बना ही चुके हैं लेकिन साथ में इसके कवर पर दिखने वाली छोटी सी बच्ची भी लोगों के बीच एक अलग पहचान बना चुकी है.