अब तक बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के मामले जन्म के 6 माह बाद सामने आते थे लेकिन इंग्लैंड में गर्भस्थ शिशु के डायबिटीज का मामला सामने आया है. डायबिटीज के इतिहास मेंं ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी अजन्मे बच्चे को शुगर की बीमारी निकली है. टाइप-1 डायबिटीज ऐसी ऑटो इम्यून डिसीज है जिसकी शुरुआत आमतौर पर बचपन में ही हो जाती है. इसका पूरी तरह से इलाज संभव नहीं है, सिर्फ दवाओं और सावधानियों की मदद से इसे कंट्रोल किया जा सकता है. डायबिटीज के मरीजों में मांसपेशियों का कमजोर होना, आंखों की रोशनी घटना, किडनी डिसीज, स्ट्रोक और हार्ट डिसीज का खतरा बढ़ता है.