दिल्ली के एक कोर्ट ने पिछले साल नॉर्थ ईस्ट दिल्ली दंगों के दौरान एक व्यक्ति को गोली मारने के आरोप में गिरफ्तार दो लोगों को बरी कर दिया है. इस मामले में फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने रूसी लेखक फ्योडोर दोस्तोवस्की की मशहूर किताब क्राइम एंड पनिशमेंट का हवाला दिया.
उन्होंने कहा कि सौ खरगोशों से आप एक घोड़ा नहीं बना सकते और सौ संदेह एक प्रमाण नहीं बन सकता. दरअसल एडिशनल सेशन जज अमिताभ रावत ने ये भी सवाल किया कि कैसे उनके खिलाफ हत्या के प्रयास का आरोप लगाया जा सकता है जबकि पुलिस पीड़ित पुलिस जांचसे अनुपस्थित है और कभी पुलिस के पास आया ही नहीं. कोर्ट ने इन दोनों को हत्या की कोशिश और आर्म्स एक्ट के आरोप से मुक्त करते हुए कहा कि ये ऐसा मामला है जहां कौन कहेगा कि किसने किस पर गोली चलाई और कहां चलाई. यह मामला वेलकम इलाके में राहुल नाम के व्यक्ति पर कथित तौर पर गोली चलाने के सिलसिले में दर्ज किया गया था. अदालत ने कहा, हालांकि दोनों आरोपियों के खिलाफ गैर कानूनी तरीके से जमा होने एवं दंगा करने के आधार पर मामला चलाया जा सकता