Chief Justice of India NV Ramana ने कहा है कि सोशल मीडिया (Social Media) पर किसी मुद्दे को भावनात्मक तरीके से बढ़ा-चढ़ाकर बताए जाने से जजों की राय प्रभावित नहीं होनी चाहिए. जस्टिस एनवी रमना ने पीडी देसाई मेमोरियल लेक्चर को वर्चुअल तरीके से संबोधित करते हुए ये बात कही.
उन्होंने कहा कि मीडिया ट्रायल (Media Trial) किसी भी मामले को तय करने में मार्गदर्शक नहीं बन सकता हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि आलोचना और विरोध की आवाज लोकतंत्र का अनिवार्य हिस्सा हैं.
इसके अलावा CJI ने कहा कि न्यायपालिका को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से, विधायिका या कार्यपालिका द्वारा नियंत्रित नहीं किया जा सकता है, वरना ‘कानून का शासन’ भ्रामक हो जाएगा. जस्टिस रमना ने अंग्रेजी हुकूमत का हवाला देते हुए कहा कि कई बार सरकार का बनाया हुआ कानून भी अन्याय का कारण होता है.