हाइलाइट्स

  • मिशन 2024 के लिए क्षत्रपों की बड़ी चुनौती
  • मोदी के सामने विरोधियों की बढ़ेंगी मुश्किलें
  • BJP का मुकाबला कर पाएगा विपक्ष ?

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राष्ट्रपति चुनाव में एक बार फिर से विपक्षी कुनबा पूरी तरह से बिखरा नजर आया. इसके साथ ही मोदी के खिलाफ विपक्ष की एकजुटता की कोशिश नाकाम साबित हुई.

राष्ट्रपति चुनाव (Presidential Election) तो संपन्न हो गया. लेकिन इस चुनाव ने विपक्षी एकजुटता की एक बार फिर से पोल खोलकर रख दी है. राष्ट्रपति उम्मीदवार के तौर पर आदिवासी महिला वाले बीजेपी (BJP) के दांव के आगे विपक्ष चारों खाने चित नजर आया. राष्ट्रपति चुनाव में बने और बिगड़े राजनीतिक समीकरण से विपक्षी दलों को जोर का झटका लगा है. कांग्रेस (Congress) में कई राज्यों में बगावत दिखाई दी. तो कई क्षत्रप अपने विधायकों को भी संभाल नहीं पाए. यहां तक कि सहयोगियों ने भी साथ छोड़ दिया. हालांकि साल 2014 से लेकर अब तक यानी बीते 8 वर्षों दौरान कमोवेश यही स्थिति देखने को मिली. बीजेपी के खिलाफ विपक्ष (Opposition) को एकजुट करने की कई बार कोशिशें की गई. लेकिन सभी नाकाम साबित हुईं. इसके उलट बीजेपी पहले से और मजबूत होती चली गई. मोदी युग में कांग्रेस समेत तमाम क्षत्रपों के लिए अपना कुनबा बचाना मुश्किल सरीखा हो गया है.

2014 के बाद बीजेपी VS विपक्ष
साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने देश के प्रधानमंत्री के तौर पर कमान संभाली थी. उस वक्त देश के सिर्फ 7 राज्यों में ही बीजेपी और सहयोगियों की सरकार थी. आज केंद्र की सरकार के अलावा 18 राज्यों में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों का शासन है. इस साल चार राज्यों में हुए चुनाव के बाद कांग्रेस और उसके सहयोगियों का शासन सिर्फ तीन राज्यों तक सिमट कर रह गया है. 2014 के बाद से क्षेत्रीय दल भी कुछ खास करने में नाकाम रहे. समाजवादी पार्टी, बीएसपी, आरजेडी, जेडीएस और लेफ्ट सरीखे क्षेत्रीय दलों के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा. 2014 चुनाव के अपवाद को छोड़ दें तो करीब 3 दशक तक इन्हीं दलों के पास सत्ता की चाबी रही है. बिना इनके समर्थन के केंद्र में सरकार का गठन नहीं हो पाया.

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बीजेपी VS कांग्रेस वाले राज्य
देश के करीब 7 ऐसे राज्य हैं जहां की सियासत बीजेपी और कांग्रेस के ईर्द-गिर्द घूमती है. इनमें दिल्ली, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड प्रमुख हैं. अब तो मणिपुर, त्रिपुरा और कर्नाटक भी इस लिस्ट में शामिल हो चुका है. लेकिन मोदी युग के बाद इन राज्यों में चुनावी पैटर्न पूरी तरह बदल गया है. इन राज्यों में बीजेपी ने जबर्दस्त तरीके से कांग्रेस पर बढ़त हासिल कर ली है. दिल्ली में आप ने कांग्रेस की जगह ले ली. इसका असर यह हुआ कि इन राज्यों में कांग्रेस कमजोर हो गई, जिसका खामियाजा उसे राष्ट्रीय स्तर भुगतना पड़ रहा है.

क्षत्रपों के बीच BJP का प्रभाव
2014 के बाद बीजेपी उन राज्यों में भी मजबूत हुई है, जहां उसका कोई भी नामलेवा नहीं था. खासकर बंगाल, ओडिशा और तेलंगाना (Bengal, Odisha, Telangana) जैसे राज्यों में कांग्रेस और अन्य पार्टियों की जगह हथिया कर बीजेपी ने मुख्य विपक्षी दल के तौर पर खुद को स्थापित कर लिया है. 2014 के चुनाव में बीजेपी ने ओडिशा में सिर्फ 1 लोकसभा सीट जीती थी, जो 2019 के चुनाव में बढ़कर 8 हो गई. इसी तरह 2014 में बंगाल में सिर्फ 2 सीटें जीतने वाली बीजेपी 2019 के चुनाव में 18 सीटें जीतने में कामयाब हो गई. तेलंगाना में भी बीजेपी के 4 लोकसभा सांसद हैं. वहीं 2020 के हैदराबाद निगम चुनाव में बीजेपी दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.

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बहुदलीय प्रभाव वाले राज्यों में BJP
ऐसे राज्य जहां कई दलों के बीच चुनावी मुकाबला होता रहा है. खासकर नॉर्थ-ईस्ट, असम, उत्तर प्रदेश, और झारखंड (North East, Assam, Uttar Pradesh, Jharkhand) सरीखे राज्यों में भी बीजेपी ने अपना दबदबा कायम कर लिया है. इस लिस्ट में महाराष्ट्र (Maharashtra) को भी शामिल किया जा सकता है. इन राज्यों में गैरबीजेपी दल अपने वोट बैंक को सहेजने के लिए संघर्ष करते नजर आ रहे हैं.

दक्षिण में बीजेपी
इस लिस्ट में तमिलनाडू और केरल (Tamil Nadu, Kerela) दो ऐसे राज्य हैं, जहां बीजेपी की ताकत नहीं के बराबर है. हालांकि दोनों ही राज्यों में जिस तरह बीजेपी के वोट शेयर (Vote Share) में इजाफा देखने को मिला है. उससे पार्टी खासा उत्साहित है. केरल में जहां कांग्रेस कमजोर होती जा रही है और तमिलनाडू की दोनों क्षेत्रीय दल AIADMK और DMK अंदरूनी कलह झेल रहे हैं. उससे बीजेपी को इन राज्यों में उम्मीद की किरण दिखाई देने लगी है.

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