हाइलाइट्स

  • 20 साल के सबसे निम्नतम स्तर पर रुपया
  • डॉलर के मुकाबले 81 से नीचे गया रुपया
  • विदेशी बाजारों में क्यों मज़बूत हो रहा डॉलर?
  • भारत में क्यों नहीं संभल पा रहा है रुपया?

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Dollar vs Rupee: रुपये का गिरना आपकी ज़िदगी कैसे करता है तबाह?

भारत में रुपया है कि संभलने का नाम ही नहीं ले रहा. शुक्रवार को रुपया 20 साल के सबसे निम्नतम स्तर 81 के पार पहुंच गया. सवाल यह है कि रुपये के गिरने से भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर होगा? 

Rupee hits record low vs US dollar: आज एक वक़्त ऐसा भी आया जब भारतीय रुपया, डॉलर के मुक़ाबले (rupee vs dollar) 20 साल के सबसे निम्नतम स्तर पर जा पहुंचा. शुक्रवार सुबह डॉलर के मुकाबले रुपया 62 पैसे गिरकर 81.09 के स्तर पर पहुंच गया. जानकार बताते हैं कि विदेशी बाजारों में अमेरिकी मुद्रा (US Dollar) की मज़बूती, घरेलू शेयर बाजार (Share Market) में गिरावट और कच्चे तेल (Crude oil) के दामों में बढ़ोतरी, रुपये को प्रभावित कर रही है. एक सच यह भी है कि इन दिनों पूरी दुनिया में आसमान छूती महंगाई है. जिसे कंट्रोल करने के लिए दुनियाभर की बैंक ब्याज़ दरें बढ़ा रही हैं. लेकिन यह प्रयास कहीं दुनिया को मंदी को तरफ तो नहीं धकेल रहा?

गुजरात का शासन संभालने वाले तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi), जिन्हें तब मालूम था कि रुपया ऐसे ही नहीं गिरता, आज प्रधानमंत्री बनने के बाद उसको संभाल नहीं पा रहे हैं. रुपये के गिरने पर विरोधी आज कुछ ऐसा ही कहकर पीएम मोदी (PM Modi) पर चुटकी ले रहे हैं.

रुपये का गिरना, विपक्ष का तंज और मंदी की आहट के बीच लोगों के लिए यह समझना बेहद ज़रूरी है कि अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में रुपये के गिरने से भारत की साख भले ना गिरे लेकिन अभिभावक होने के नाते परिवार में आपकी साख ज़रूर गिरेगी. कैसे गिरेगी?

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रुपये का गिरना जारी रहेगा

कई जानकारों का मानना है कि आने वाले समय में रुपये में और भी गिरावट देखने को मिल सकती है. सवाल उठता है कि अभी रुपये में गिरावट की मुख्य वजह क्या है? दरअसल अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक ने महंगाई पर काबू पाने के लिए ब्याज़ दरों में 0.75 फीसदी की बढ़ोतरी की है. ठीक वैसे ही जैसे अगस्त महीने में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने रेपो रेट बढ़ाने का निर्णय लिया था.

रेपो दर (Repo Rate), वह ब्याज दर है जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंको को रुपये उधार देता है. तर्क दिया गया कि इससे महंगाई कंट्रोल में रहेगी. ठीक उसी तर्ज़ पर अमेरिका समेत अन्य सभी देश महंगाई कंट्रोल में लाने के लिए ब्याज़ दरों को बढ़ा रहे हैं. एक नज़र उन देशों पर जिसने ब्याज़ दरों में भारी बढ़ोतरी की है.

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ब्याज़ दर बढ़ाने वाले देश
ताइवान- 12.5%
वियतनाम- 1.00%
अमेरिका- 0.75%
हांगकांग- 0.75%
फिलीपीन- 0.50%
इंग्लैंड- 0.50%
नार्वे- 0.50%

यहां की करेंसी भी गिरी

अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक के ब्याज़ बढ़ाने का असर यह हुआ कि ब्रिटिश पाउंड, डॉलर के मुक़ाबले 37 सालों में सबसे कमजोर स्तर पर पहुंच गया. वहीं ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड का डॉलर जापानी येन की तुलना में 2020 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया. जबकि चीन का युआन 27 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गया.

इसके अलावा इंडोनेशिया, फिलीपीन और जापानी येन में भी भारी गिरावट हुई है. कई जानकारों का मानना है कि महंगाई पर काबू पाने के चक्कर में विश्व कहीं मंदी के दलदल में ना फंस जाए. हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक के चेयरमैन जेरोम पॉवेल का कहना है कि ब्याज़ दरों के बढ़ने से मंदी आएगी, ऐसा कोई दावा नहीं कर सकता. अगर मंदी आयी भी तो इसका कैसा असर होगा, इस बारे में कोई नहीं बता सकता.

रुपया कैसे हुआ कमजोर?

अब सवाल उठता है कि इसका असर भारत के रुपये पर कैसे पड़ा? चलिए इसको खंड-खंड कर समझते हैं. अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक के ब्याज़ बढ़ाने और आगे भी सख़्ती के संकेत की वजह से वैश्विक बाज़ार में कमज़ोरी आई. इसका असर यह हुआ कि भारतीय निवेशकों की धारणा भी प्रभावित हुई और भारतीय बाज़ार भी डाउन हो गया. जिसके बाद रुपये में भारी गिरावट देखने को मिली. हालांकि भारतीय रुपये में गिरावट की कुछ और वजहें भी बताई जा रही हैं.

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क्यों गिरा रुपया?

  • रूस-यूक्रेन के बीच तनाव की वजह से निवेशक बाज़ार में पैसे लगाने से डर रहे हैं. वह ज़ोखिम लेना नहीं चाहते
  • अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की बढ़ती क़ीमत भी रुपये पर बड़ा प्रभाव डाल रही है
  • भारतीय शेयर बाज़ार के गिरने से भारतीय रुपये पर दबाव बढ़ गया, नतीजा गिरावट
  • वहीं अमेरिकी डॉलर विदेशी बाज़ार में अन्य मुद्रा की तुलना में और मज़बूत हो गया

कमजोर रुपया आपको कैसे करेगा तबाह?

सवाल उठता है कि रुपये की गिरती क़ीमत आपकी और हमारी साख कैसे कम करती है? सीधे शब्दों में कहूं तो हमारे-आपके जीवन को कैसे प्रभावित करती है? हम विदेश से कच्चा तेल आयात करते हैं. रुपये के कमज़ोर होने से हमें ज़्यादा पैसे देने होंगे. नतीजा महंगाई बढ़ेगी. सब्जियां हों, दाल चावल या तेल.... सभी खाद्य पदार्थ महंगे होंगे. जो भी सामान हम दूसरे देशों से खरीदते हैं हमें उसके बदले ज्यादा पैसे देने होंगे. क्योंकि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार डॉलर में होता है.

ऐसे में हमें अपने देश में सामान महंगे दामों पर खरीदने होंगे. अगर आपके बच्चे विदेश में पढ़ाई करते हैं तो जिस कोर्स के लिए आप एक लाख रुपये दे रहे थे अब उसी कोर्स के लिए और ज्यादा पैसे देने होंगे. विदेश घूमने जाने वाले लोगों को भी अपनी पॉकेट ज़्यादा ढीली करनी होगी. ऐसा नहीं है कि हमारे राजनेता इन बातों को नहीं समझते.. यकीन ना हो तो पीएम मोदी का एक पुराना बयान सुन लीजिए, जिसमें वह बता रहे हैं कि उन्हें रुपये गिरने की सारी हक़ीक़त मालूम है. ये अलग बात है कि तब नरेंद्र मोदी, गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे.

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विपक्ष पीएम मोदी पर लगा रहा आरोप

फिर क्या वजह है कि हमारी सरकार रुपये को गिरने से रोक नहीं पा रही है. तो क्या मान लिया जाए कि सरकार पूरी तरह विफल हो चुकी है? तो क्या मान लिया जाए कि विपक्ष के सभी आरोप ठीक हैं... एक नज़र कांग्रेस प्रवक्ता गौरव वल्लभ के बयान पर डालते हैं और सुनते हैं कि वह क्या कह रहे हैं.

आने वाले समय पूरी दुनिया के लिए कैसा होने वाला है, क्या विश्व के सामने मंदी मुंह बाए खड़ा है? देश की अर्थव्यस्था मज़बूत करने के दावे के बीच महंगाई पर कंट्रोल, सरकार कैसे करेगी?

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