भारत में कोरोना (Coronavirus) की दूसरी लहर ने कोहराम मचा रखा है. दूसरी लहर के 80 दिनों में 1.50 करोड़ से ज्यादा नए केस दर्ज हुए हैं जबकि करीब 1 लाख लोग जिंदगी की जंग भी हार चुके हैं.
इस भयंकर त्रासदी के पीछे कोरोना के डबल म्यूटेशन (Double Mutant) को जिम्मेदार माना जा रहा है. वैज्ञानिक भाषा में इसे कोरोना का B.1.617 वैरिएंट कहा जाता है. इस वैरिएंट का असर दुनिया के 44 देशों में देखा जा रहा है.
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तमाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इसे भारतीय वैरिएंट भी कहा जा रहा है लेकिन केन्द्र सरकार इससे साफ इनकार कर रही है. भारत सरकार ने तो बकायदा B.1.617 को 'भारतीय वेरिएंट' बताने वाली सारी पोस्ट्स हटाने को भी कह दिया है. खुद WHO ने अपनी रिपोर्ट में इसे इंडियन वैरिएंट नहीं कहा है.
आइए जानते हैं कि आखिर क्या है B.1.617 वैरिएंट और इसका क्या है असर?
1. वुहान में मिले ओरिजिनल कोरोना वायरस से ज्यादा संक्रामक.
2. जीनोमिक डेटा बताता है कि ब्रिटेन में सबसे पहले मिला ये वैरिएंट.
3. भारत में सबसे पहले महाराष्ट्र में मिला B.1.617 वैरिएंट.
4. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे ने पता लगाया.
5. इस वैरिएंट को तीन सब-लाइनेज में बांटा गया. ये हैं- B.1.617.1, 6. B.1.617.2 और B.1.617.3. इसमें से शुरुआती दो सबसे खतरनाक माने जा रहे.
6. महाराष्ट्र में 60% केसेज के लिए B.1.617 ही जिम्मेदार.
अब जानते हैं इसके बारे में वैज्ञानिक ने रिचर्स में और क्या पता लगाया है. पूरी दुनिया में स्वास्थ्य के क्षेत्र में सबसे बड़ी संस्था WHO ने इसके बारे में क्या कहा है?
1. B.1.617 वैरिएंट ने स्पाइक प्रोटीन में 8 म्यूटेशन किए हैं.
2. इसमें दो म्यूटेशंस यूके और दक्षिण अफ्रीकी वैरिएंट्स जैसे और एक म्यूटेशन ब्राजील वैरिएंट जैसा था, रिसर्च जारी है.
3. अब तक दुनिया के 44 देशों में मिल चुका है ये वैरिएंट.
4. WHO ने इसे वैरिएंट्स ऑफ कंसर्न की श्रेणी में रखा.
5. जितना मल्टीप्लाई होगा उसमें म्यूटेशन उतना अधिक होगा.
जाहिर है ये वैरिएंट काफी खतरनाक है और भारत में मचे कोरोना के कोहराम के पीछे बहुत हद तक ये ही जिम्मेदार है. भारत में पिछले अक्टूबर में ही इस वैरिएंट का पता लग गया था. जिसके बाद अप्रैल 2021 के बाद भारत में सीक्वेंस किए गए सैम्पल्स में 21% केसेज B.1.617.1 के और 7% केसेस B.1.617.2 के थे. यानी केसों में बढ़ोतरी के लिए यह जिम्मेदार है.
मशहूर वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील का कहना है कि B.1.617 वैरिएंट्स अपने परिवार में सबसे ज्यादा फिट है. इसलिए ये ज्यादा लोगों को अपना शिकार बना रहा है.
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यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज के वायरोलॉजिस्ट रवींद्र गुप्ता भी कहते हैं कि इस वैरिएंट की ट्रांसमिशन क्षमता सबसे ज्यादा है.
1. अब तक मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का असर कम दिखा है
2. भारत बायोटेक की कोवैक्सिन इस वैरिएंट पर असरदार
3. कोविशील्ड और स्पूतनिक वैक्सीन पर रिसर्च जारी है
4. फाइजर की वैक्सीन को चकमा दे सकता है ये वैरिएंट
5. वैक्सीन लगे होने पर गंभीर लक्षण होने की आशंका कम
बहरहाल WHO की नई रिपोर्ट में कहा गया है कि वायरस जितने समय तक हमारे बीच रहेगा, उतना ही उसके गंभीर वैरिएंट्स सामने आने की आशंका बनी रहेगी.
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अगर इस वायरस ने जानवरों को इन्फेक्ट किया और ज्यादा खतरनाक वैरिएंट्स बनते चले गए तो इस महामारी को रोकना बहुत मुश्किल होने वाला है. जाहिर है ऐसी स्थिति में सावधानी ही बचाव का एकमात्र उपाय है.