उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के गाजियाबाद (Ghaziabad) में एक बुजुर्ग की पिटाई से जुड़े मामले में ऑनलाइन न्यूज प्लेटफॉर्म 'द वायर' समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किए जाने के कुछ दिनों बाद, यूपी पुलिस ने उसी न्यूज पोर्टल के खिलाफ एक और मामला दर्ज किया है. इस बार बाराबंकी (Barabanki) में एक मस्जिद के ढाहने से जुड़ी डॉक्यूमेंट्री पर प्राथमिकी दर्ज कराई गई है. FIR में न्यूज़ पोर्टल को नामजद करने के अलावा वहां काम करने वाले दो पत्रकारों को भी नामित किया गया, इन पर दंगा भड़काने की मंशा और आपराधिक साजिश रचने जैसी धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. हालांकि द वायर के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने एक बयान में कहा है कि योगी आदित्यनाथ सरकार मीडिया की स्वतंत्रता में विश्वास नहीं रखती है और राज्य में क्या हो रहा है, इसकी रिपोर्ट करने वाले पत्रकारों के कामों का अपराधीकरण कर रही है. यूपी में, राजनेता और असामाजिक तत्व खुले तौर पर सांप्रदायिक नफरत फैला सकते हैं और हिंसा की वकालत कर सकते हैं, लेकिन पुलिस कभी भी इन कार्यों को सांप्रदायिक सद्भाव के खिलाफ और कानून-व्यवस्था के लिए खतरा नहीं मानती है." उन्होंने कहा, "लेकिन जब पत्रकार उन लोगों के बयानों की रिपोर्ट करते हैं जो प्रशासन की ओर से गलत काम करने का आरोप लगाते हैं - इस मामले में भी एक मस्जिद के अवैध विध्वंस का आरोप है - तो पत्रकारों पर प्राथमिकी तुरंत दर्ज की जाती है."
आपको बता दें कि भारत में प्रेस फ्रीडम को लेकर सरकार पर लगातार निशाना साधा जा रहा है Reporters Without Borders(RSF) ने प्रेस फ्रीडम इंडेक्स की 2021 की लिस्ट में भारत को 180 देशों की सूची में 142वा स्थान दिया है. वहीं 2016 में भारत की रैंकिंग 133 थी तो साल 2010 में भारत इस लिस्ट में 122 वें नंबर पर था.