देश में वैक्सीन की किल्लत के बीच सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से वैक्सीनेशन प्रोग्राम (Vaccination Program) को लेकर कई कड़े सवाल पूछे. अदालत ने सरकार की वैक्सीनेशन पॉलिसी (Flaws in Vaccination Policy) में मौजूद खामियों को गिनवाया और टीके की अलग-अलग कीमतों, स्टॉक की कमी और गांवों में वैक्सीनेशन की समस्याओं पर सवाल उठाए. सुप्रीम कोर्ट में तीन जजों की बेंच ने सरकार से पूछा कि- अपनी दलील में आपने कहा था कि 45 साल से ऊपर के लोगों में मृत्यु दर ज्यादा है, लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने इसे झुठला दिया. सेकेंड वेव में तो 18 से 44 साल के लोग ज्यादा संकट में हैं. SC ने पूछा कि अब जब वैक्सीन की खरीद हो रही है तो सरकार बस 45 से ऊपर वालों के लिए ही क्यों वैक्सीन खरीद रही है.
इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि पूरे देश के लिए वैक्सीन की एक कीमत तय करने की जिम्मेदारी आपको लेनी होगी. दरअसल अदालत को इस बिंदु पर इस लिए संज्ञान लेना पड़ा क्योंकि राज्य सरकारों की लगातार वैक्सीन की मांग को पूरा करने में असमर्थ रहने पर अप्रैल के अंत में केंद्र सरकार ने राज्यों को कह दिया था कि वो अपनी वैक्सीन का समाधान खुद निकालें. खुद टीका खरीदें, ग्लोबल टेंडर दें और कंपनियां जो दाम तय करें उसपर लें. हालांकि ये भी फ्लॉप रहा और सिर्फ समय बर्बाद हुआ, जिसकी जानकारों ने पहले ही आशंका जताई थी. इसके अलावा कोर्ट ने गांवों में इंटरनेट सुविधा का हवाला देते हुए सरकार से वहां के लोगों के लिए रजिस्ट्रेशन का व्यवहारिक हल पूछा.
वहीं सरकार ने कोर्ट को बताया है कि इस साल के अंत तक वो 18 साल से ऊपर की पूरी आबादी को वैक्सीन दे देगी. हालांकि 5 अप्रैल को 43 लाख डोज़ के उच्चतम स्तर से 9 मई को ये गिरकर 7 लाख डोज़ पर आ गया था, और 31 मई को ये रहा 10 लाख 18 हजार. ऐसे में बड़ा सवाल है कि ऐसे कैसे साल के अंत तक पूरे देश वैक्सीनेट हो सकेगा.