सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) ने शुक्रवार को काला जादू और जबरन धर्मांतरण (proselyte) की अर्जी पर सुनवाई से इनकार कर दिया. बीजेपी (BJP) नेता और वकील अश्विनी उपाध्याय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर अंधविश्वास के चलन, काला जादू और अवैध व जबरन धर्म परिवर्तन पर रोक लगाने की मांग की गई थी. कोर्ट ने कहा कि ऐसा कोई कारण नहीं दिखता जिससे 18 साल से ऊपर की उम्र का कोई भी व्यक्ति अपना धर्म (religion) नहीं चुन सकता है. अदालत ने कहा कि देश में कोई भी वयस्क (adult) अपने मन मुताबिक धर्म को अपना सकता है और उसे ऐसा करने की पूरी आजादी है. अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया और अश्विनी उपाध्यय को फटकार भी लगाई. इसके साथ ही अदालत ने कहा कि यह PIL पब्लिसिटी इंटरेस्ट लिटिगेशन जैसी हो गई है, जिसका मकसद लोकप्रियता हासिल करना है.