Rakesh Tikait Exclusive: दिल्ली के द्वार पर आंदोलन कर रहे किसानों का 26 जनवरी और 2022 UP चुनाव को लेकर क्या मास्टर प्लान है? इसको लेकर भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने editorji से खास बातचीत की. क्या कुछ कहा उन्होंने खास. आइए जानते हैं.
सवाल- एक साल हो गया है, आपको क्या लगता है आगे क्या होने वाला है, क्या किसान थक गए हैं ?
जवाब- ये आंदोलन चलता रहेगा. इन सरकारों को बातचीत करनी पड़ेगी. वो आज कर लें या फिर एक साल बाद कर लें. किसान तो बर्बाद हो चुका है, ये किसान के जीवन मरण का सवाल है.
सवाल- एक साल से आप बॉर्डर पर हैं, घर को छोड़कर बाहर हैं, किसानों को नहीं लग रहा है कि हमें बातचीत कर लेनी चाहिए, इससे क्या होने वाला है, समझौता कर लेना चाहिए.
जवाब- ये तो सरकार को सोचना है, हम तो अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं.
सवाल- सरकार का कहना है कि हम बातचीत के लिए तैयार हैं, कुछ चेंज करना है तो कर देंगे, MSP को भी रखेंगे.
जवाब- ये सरकार गलत जानकारी शेयर कर रही है, ये कंडिशन लगाते हैं, कानून वापसी नहीं होंगे पर बात कर लो, MSP पर अभी तक कोई बात नहीं की. देश की सरकार को शर्म नहीं आती.
सवाल- क्या आप ये भी कह सकते हैं कि किसान की तरफ से कोई कंडिशन नहीं होगी?
जवाब- बैठ के बात करो, हमको मंजूर होगा तो मान लेंगे...आप हमारी नहीं मान रहे, हम आपकी नहीं मान रहे. बंदूक की ताकत पर आप समझौते पर हस्ताक्षर करवाना चाहते हो, वो तो नहीं होगा.
सवाल- सरकार कह रही है कि किसानों को शायद ठीक से समझाया नहीं गया है.
जवाब- दिल्ली में बैठकर आदमी बताएगा की खेती कैसे होगी? खेती के तरीके बताएंगे हमें. बिहार में तो मंडियां बंद हैं, बिहार का किसान मालामाल क्यों नहीं हुआ?
सवाल- सरकार का ये कहना है कि जो प्रदर्शन कर रहे हैं वो किसान पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हैं, देश के बाकी किसान अब भी खुश हैं.
जवाब- दिल्ली आने के लिए सारी ट्रेनें बंद हैं, स्पेशल ट्रेनों के नाम पर ज्यादा किराया वसूला जा रहा है. आपने एग्रीकल्चर के साथ-साथ देश की दूसरी संस्थाएं भी बेच दी. MSP पर गारंटी कानून बनना चाहिए.
सवाल- क्या किसान अपने आंदोलन को आगे एक राजनीतिक मोड़ देना चाह रहे हैं, क्योंकि उत्तर प्रदेश के चुनाव आ रहे हैं, क्या आप गांव-गांव जाएंगे और इसे राजनीतिक मोड़ भी देंगे?
जवाब- किस तरह के राजनीतिक मोड़ की आप बात कर रहे हैं, मैं समझा नहीं.
सवाल- जैसे पश्चिम बंगाल के किसानों ने कहा था कि बीजेपी को वोट ना दें, क्या आप भी वैसे ही करेंगे?
जवाब- जो आदमी इनसे खुश होगा वो इन्हें वोट दे देगा, जो नाराज होगा वो दूसरे को वोट दे देगा. वोट तो सबका अपना अधिकार है.
सवाल- क्या किसानों का प्रदर्शन उत्तर प्रदेश के चुनाव में बड़ा मुद्दा बनेगा.
जवाब- हां बिल्कुल, ये मुद्दा बनेगा.
सवाल- करनाल में जो घटना हुई, उसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
जवाब- सरकार की वो सोची समझी चाल थी, कि हम अपनी पूरी ताकत करनाल में लगा दें लेकिन हमने ऐसा नहीं किया, हमको आंदोलन को करनाल में शिफ्ट नहीं होने देना था.
सवाल- पराली जलाने पर आप क्या कहेंगे, कहा जाता है कि इससे प्रदूषण होता है, तो पंजाब के किसान क्या पराली जलाएंगे?
जवाब- क्या पंजाब और दिल्ली के बीच कोई कनेक्टिवी है कि पराली जलाएं पंजाब में और प्रदूषण हो दिल्ली में. आस पास के इलाकों में क्यों नहीं होता प्रदूषण? दिल्ली का पॉल्यूशन दिल्ली का है.
सवाल- पॉल्यूशन तो हर जगह फैल रहा है दिल्ली में भी, हरियाणा में भी.
जवाब- पॉल्यूशन रोकने की जिम्मेदारी सिर्फ किसान की ही नहीं है, इतने बड़े-बड़े साइंटिस्ट हैं, चांद पर तो जाना चाहते हो पराली का भी कोई अरेंजमेंट कर लो.
सवाल- अगर साइंटिस्ट बताएंगे तो किसान वो तरीके अपनाएंगे?
जवाब- दिल्ली और चंडीगढ़ की चमकीली कोठियों में बैठ के पराली का सोल्यूशन बताएंगे. चावल बढ़िया चाहिए पर पराली पॉल्यूशन फेंकती है. पराली ना जले और चावल पैदा हो जाए, ये हुनर हमें भी बता दो.
सवाल- तो आप क्या चाह रहे हैं कि सरकार बातचीत करे?
जवाब- हम दिल्ली के दरवाजे पर बैठे हैं, वरना 26 तारीख फिर आ जाएगी, सरकार के कान खुल गए हों तो बातचीत शुरू कर ले, वरना हम तो फिर वहीं के वहीं हैं.
सवाल- आप कह रहे हैं कि 26 जनवरी फिर से आ रही है?
जवाब- 26 तारीख तो हर महीने आती है, मैं क्या नक्शे से काट दूं 26 तारीख. 26 जनवरी भी हर साल आएगी.
सवाल- किसान उसी तादाद के साथ अब भी आपके साथ हैं?
जवाब- पूरी ताकत के साथ किसान बैठा है, ट्रैक्टर में तेल डलवाकर दिल्ली की राह को खड़े किए हुए हैं.
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