कई बार हम ये समझ नहीं पाते ही कि हम किस वजह से परेशान हैं और धीरे धीरे ये परेशानियां आपको मेन्टल हेल्थ पर असर डालने लगती हैं और आप डिप्रेशन के शिकार हो सकते हैं. वैसे तो डिप्रेशन की कई वजह हैं लेकिन आपका समय से ना सोना और नींद पूरी ना करना भी इसकी एक वजह बन सकता है. कोलोराडो बोल्डर यूनिवर्सिटी, एमआईटी और हार्वर्ड के ब्रॉड इंस्टीट्यूट के रिसर्चर ने लगभग 8,40,000 लोगों पर एक स्टडी की है जिसमें ये बात सामने आई है कि रात को देर से सोने और सुबह देर से उठने की आदत डिप्रेशन को बढ़ावा देती है.
JAMA Psychiatry की एक स्टडी कहती है कि अगर हम अपने उठने के तय समय से एक घंटा पहले जागते हैं तो डिप्रेशन को 23 परसेंट तक कम कर सकते हैं और आप सुबह जल्दी तब ही उठ पाएंगे जब आप रात को जल्दी सोएंगे.
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अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो रात को 2-3 बजे तक जागते हैं और सुबह 12 बजे उठकर सोचते हैं कि आपकी नींद पूरी हो गई तो आपको बता दें कि आप बहुत बड़ी गलती करते हैं. यही गलती आपकी मेन्टल हेल्थ को बिगाड़ती है और उस से जुड़ी समस्याओं की वजह बनती है.
स्टडी से पता चलता है कि अगर कोई व्यक्ति जो आम तौर पर 1 बजे सोने के लिए बिस्तर पर जाता है, अगर वो रात 11 बजे बिस्तर पर जाए और उसे नींद आ जाए तो वो डिप्रेशन के खतरे को लगभग 40 प्रतिशत तक कम कर सकता है. लेकिन इसका मतलब ये बिलकुल भी नहीं है कि आपको आपके बॉडी क्लॉक के साथ खिलवाड़ करना है.
सेलीन वेटर के मुताबिक, जब किसी को जबरदस्ती उसकी बॉडी क्लॉक के खिलाफ जाकर देर तक जागने या फिर सुबह जल्दी उठने को कहा जाता है तो उसका भी बुरा असर होता है. शरीर से की गई जबरदस्ती कभी भी फायदेमंद नहीं होती. लोगों को उनकी सर्कैडियन क्लॉक यानी बॉडी क्लॉक के हिसाब से ही चलने दिया जाए, तो वो ज़्यादा स्वस्थ रहेंगे. ऐसे में अगर देर तक जागने या फिर सुबह देर तक सोने की आदत बदलनी हो तो इसके लिए बॉडी क्लॉक को सुधारना जरूरी है. इसके लिए अपनी बॉडी को रिदम में लाएं. खाना वर्कआउट, सोना, जागना हर चीज़ पर ध्यान देना होगा.
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