क्या आप असली और नकली बनारसी साड़ी में फर्क कर सकते हैं? ये सवाल इसीलिए क्योंकि महंगी बनारसी साड़ी के नाम अक्सर लोग नकली साड़ियों से ठगे जाते हैं. क्योंकि अधिकतर लोगों को इसकी पहचान नहीं होती ऐसे में दुकानदार की बात पर विश्वास करने के अलावा कोई ऑप्शन नहीं बच पाता.
लेकिन अब चिंता की जरूरत नहीं है! अब असली बनारसी साड़ियों की पहचान बेहद आसान हो जाएगी. वो भी क्यू आर कोड से... अब QR code और LOGO की मदद से बनारसी साड़ी के असली और नकली होने का पता चलेगा, वो कैसे? चलिये बताते हैं.
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दरअसल, IIT बीएचयू ने टेक्नोलॉजी की मदद से हैंडलूम बनारसी साड़ियों में खास तरह का वीविंग क्यू आर कोड (Weaving QR Code) के अलावा जीआई टैग का लोगो (GI Tag Logo) बनाया है. जिसको मोबाइल फोन से स्कैन कर आप आसानी से असली हैंडलूम बनारसी साड़ी की पहचान के साथ ही उसकी खूबी को जान सकेंगे. क्यूआर कोड स्कैन करते ही साड़ी के बारे में पूरी जानकारी खरीदार को मिल जाएगी.
IIT-BHU के मैकेनिकल इंजीनियरिंग के रिसर्च स्कॉलर एम कृष्ण प्रसन्ना नाइक ने क्यूआर कोड और साड़ी पर लोगो बुनाई की तकनीक तैयार की है. बनारसी साड़ी का निर्माता अपनी फर्म और बनाने की पूरी डिटेल के साथ साड़ी पर क्यूआर कोड बुन सकता है. ग्राहक साड़ी पर बुने गए क्यूआर कोड को स्कैन कर उसकी क्वालिटी के बारे में जानकारी ले सकेंगे. अच्छी बात ये है कि क्यूआर कोड और लोगो डिजाइन से कपड़े की मजबूती और खूबसूरती पर कोई असर नहीं पड़ेगा. इसके लिए 6.50 मीटर के साड़ी की लंबाई के पहले सादे कपड़े के 6-7 इंच के टुकड़े पर पैच में क्यू आर कोड और लोगो डिज़ाइन किया जाएगा.
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दरअसल क्या होता है कि ग्राहकों को हथकरघा और पावरलूम साड़ी के बीच अंतर के बारे में जानकारी नहीं हो पाती है. जिससे दुकानदार अक्सर हैंडलूम साड़ियों के नाम पर ग्राहकों को नकली साड़ियां बेच देते हैं. क्यूआर कोड लग जाने से ना सिर्फ ग्राहकों को बनारसी साड़ी की पहचान करने में आसानी हो जाएगी और बल्कि हैंडलूम बनारसी साड़ी की बिक्री भी बढ़ जाएगी.