अब कान के मैल यानी ईयर वैक्स से शुरुआती स्तर पर ही डायबिटीज का पता लगाया जा सकेगा. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के एक्सपर्ट का दावा है कि यह 60 फीसदी तक सटीक परिणाम बताता है और सस्ता भी है. इस टेस्ट को महीने में एक बार कराया जा सकता है जैसे ब्लड टेस्ट होता है. इसके लिए कान से स्वैब सैम्पल लेकर खास सॉल्यूशन में डुबोया जाता है जिससे पता चलता है शरीर में ग्लूकोज बढ़ा हुआ है या नहीं. इससे पहले हुई स्टडी में यह सामने आया था कि कान के मैल से स्ट्रेस का पता भी लगाया जा सकता है. ईयर वैक्स सैम्पल में स्ट्रेस हार्मोन कॉर्टिसोल की मौजूदगी से पता चलता है कि इंसान तनाव या डिप्रेशन में है या नहीं.