Jallianwala Bagh: भारत में ब्रिटिश हुकूमत की क्रूरता के प्रतीक पंजाब के जलियांवाला बाग के नवीनीकरण को लेकर सियासत गरमा गई है. सोशल मीडिया पर कई लोग शहीदों के स्थल को अत्याधुनिक रंग देने का विरोध कर रहे हैं.
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा, 'जलियांवाला बाग के शहीदों का ऐसा अपमान वही कर सकता है, जो शहादत का मतलब नहीं जानता. मैं एक शहीद का बेटा हूं, शहीदों का अपमान किसी कीमत पर सहन नहीं करूंगा. हम इस अभद्र क्रूरता के खिलाफ हैं.'
वहीं, सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने कहा- ये हमारे शहीदों का अपमान है. जो लोग स्वतंत्रता संग्राम से दूर रहे, वे ही इस प्रकार का कांड कर सकते हैं.
दरअसल, ये विवाद तब शुरू हुआ जब PM मोदी ने शनिवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जलियांवाला बाग के नए स्मारक और गैलरी का उद्घाटन किया. कई इतिहासकारों ने आरोप लगाया कि सरकार ने जिन गलियारों को बदला है उनमें ही जनरल डायर ने 13 अप्रैल, 1919 को बैसाखी के दिन शांति से प्रदर्शन कर रहे भारतीयों पर गोली चलाने का आदेश दिया था. आरोप है कि सरकार ने नवीनीकरण के नाम पर दरअसल इतिहास से खिलवाड़ किया है, और जलियांवाला बाग की अहमियत को खत्म कर दिया है.
इस बदलाव पर प्रतिक्रिया देते हुए इतिहासकार और JNU के पूर्व प्रोफेसर चमन लाल ने कहा कि- 'ये इतिहास को तोड़ना-मरोड़ना है. ये कोई सुंदर बगीचा नहीं था, यहां दर्द और पीड़ा की भावना के साथ जाना चाहिए.'
वहीं, लंदन स्थित इतिहास और अमृतसर 1919 - एन एम्पायर ऑफ फियर एंड द मेकिंग ऑफ ए मैसेकर, के लेखक किम ए वैगनर ने ट्विटर पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए लिखा- 'ये सुनकर दुख हुआ कि जलियांवाला बाग को नया रूप दिया गया है - जिसका अर्थ है कि घटना के अंतिम निशान प्रभावी रूप से मिटा दिए गए हैं.'
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