भारत में कोरोना वैक्सीन (Corona vaccine in india) के दो डोज़ के बीच अंतर को बढ़ाया गया है लेकिन प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल 'द लैंसेट' (Medical Journal 'The Lancet') में छपी नई रिसर्च रिपोर्ट में इस पर सवाल उठाए गए हैं. ये रिसर्च रिपोर्ट भारत में पाए गए डेल्टा वैरिएंट (Delta variant) की बात करती है. जिसके मुताबिक वैक्सीन की डोज में अगर कम अंतर होता है तो यह डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ ज्यादा प्रभावी होगा. अध्ययन में कहा गया है कि डेल्टा वैरिएंट के प्रति एंटीबॉडी प्रतिक्रिया उन लोगों में और भी कम है, जिन्हें सिर्फ एक खुराक मिली है.
'द लैंसेट' ने अपनी रिपोर्ट में ब्रिटेन में हुए शोध का हवाला दिया है. इस संबंध में सीनियर क्लिनिकल रिसर्च फेलो एमा वॉल कहती हैं कि हमारी कोशिश अधिक से अधिक लोगों को अस्पताल से बाहर रखना है. हमारे नतीजे बताते हैं कि ऐसा करने का सबसे अच्छा तरीका है कि जल्दी से दूसरी खुराक दी जाए और उन लोगों को बूस्टर मुहैया कराया जाए, जिनकी इम्युनिटी इन नए वेरिएंट के मुकाबले ज्यादा नहीं हो सकती है. ब्रिटेन में दो डोज़ के बीच अंतर कम करने के अच्छे नतीजे आए हैं.