कोरोनावायरस महामारी के इस दौर में गिलोय का इस्तेमाल लगभग हर घर में आम हो गया है. लोग इम्यूनिटी बूस्टर की तरह काढ़े में इस्तेमाल कर इसका सेवन कर रहे है. आयुर्वेद के मुताबिक, गिलोय इम्यूनिटी बढ़ाने की एक प्रभावशाली औषधि है. गिलोय का वैज्ञानिक नाम टीनोस्पोरा कॉर्डिफोलिया (Tinospora Cordifolia) है, ये एक तरह की बेल होती है, जिसमें पान की तरह दिखने वाले पत्ते लगे होते हैं. इसकी पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फॉस्फोरस पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है. इसके अलावा इसके तनों में स्टार्च की भी अच्छी मात्रा होती है. ये एक बेहतरीन पावर ड्रिंक है, जो इम्यून सिस्टम को बूस्ट करने के साथ-साथ कई खतरनाक बीमारियों से सुरक्षा करता है. सिर्फ आयुर्वेद ही नहीं, यहां तक विज्ञान जगत के बड़े-बड़े महारथी भी गिलोय के पत्तों को एक बेहतरीन आयुर्वेदिक उपचार मानते हैं.
आयुर्वेद के मुताबिक, गिलोय किन बीमारियों में फायदेमंद है आइये जानते हैं, Jiva Ayurveda के डायरेक्टर डॉ. प्रताप चौहान से
BYTE: डॉ. प्रताप चौहान
इसमें कोई शक नहीं कि औषधीय गुणों से भरपूर गिलोय कई तरह के रोगों में चमत्कारी लाभ पहुंचाता है. हालांकि, इसके कुछ नुकसान भी हैं. इसलिए गिलोय का सेवन करने का सही तरीका मालूम होना बहुत जरूरी है. एक दिन में इसकी कितनी मात्रा लेनी चाहिए. आइये जानते हैं.
BYTE: डॉ. प्रताप चौहान
बता दें हालही में मुंबई में 6 कोरोना मरीजों में लीवर डैमेज होने की बात सामने आई थी जिसके लिए एक्सपर्ट्स ने गिलोय के सेवन को जिम्मेदार माना था. हालांकि, केंद्र सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस दावे को खारिज करते हुए इससे भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को लेकर भ्रम पैदा होने की बात कहीं थी.