IPL के इतिहास की सबसे सफल टीमों में से एक महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) की कप्तानी वाली चेन्नई सुपर किंग्स (Chennai Super Kings) ने 3 बार खिताब जीता, 5 बार उपविजेता रही है. माही की टीम ने 11 सीजन में से 10 बार लगातार प्लेऑफ भी खेला. लेकिन IPL 2020 में ये रिकॉर्ड टूट गया और टीम लीग स्टेज से ही बाहर हो गई. जाहिर है ऐसे में IPL 2021 में धोनी की कप्तानी वाली चेन्नई सुपर किंग्स दमदार वापसी करने की कोशिश करेगी. टीम का पहला मैच 10 अप्रैल को मुंबई में दिल्ली कैपिटल्स से होगा.
ओवरऑल रिकॉर्ड
CSK ने अभी तक IPL में 179 मैच खेले हैं और 106 जीते हैं और 71 मुकाबलों में टीम को हार का स्वाद चखना पड़ा है. जबकि टीम के एक मैच का नतीजा नहीं आया है. वहीं टीम का विनिंग परसेंटेज 59.83% रहा है. जो कि किसी भी टीम से ज़्यादा है. चेन्नई सुपर किंग्स का आईपीएल में सर्वाधिक स्कोर 5 विकेट पर 246 रन का है. वहीं सबसे छोटा स्कोर 100 रन का है.
अब तक का प्रदर्शन
टीम आईपीएल की शुरुआत से धोनी की कप्तानी में खेल रही है. पहले सीजन में टीम लीग स्टेज में तीसरे नंबर पर रही और फाइनल में गई लेकिन राजस्थान रॉयल्स से हार मिली. माही की कप्तानी वाली टीम साल 2010, 2011 और 2018 में चैंपियन बनी. जबकि 5 और बार फाइनल में टीम को हार का स्वाद चखना पड़ा. वहीं आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग मामले में साल 2015 में चेन्नई सुपरकिंग्स पर दो साल का बैन लगा था. जिसकी वज़ह से टीम आईपीएल 2016 और 2017 में हिस्सा नहीं ले पायी.
मजबूती
CSK का मज़बूत पक्ष उसके पास अनुभवी खिलाड़ियों का होना है जो मुश्किल परिस्थितियों में टीम की नैया पार लगाते रहे हैं. धोनी का प्रेरणादायी नेतृत्व टीम का एक अन्य सकारात्मक पहलू है. सुरेश रैना की वापसी से उसकी बल्लेबाजी मज़बूत हुई है. रैना के अलावा फाफ डु प्लेसी, धोनी, रॉबिन उथप्पा, अंबाती रायडु और ऋतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ियों की मौजूदगी में सीएसके की बल्लेबाजी मज़बूत नज़र आती है. वहीं टीम में बेहतरीन ऑलराउंडर्स की भरमार है. टीम में ड्वेन ब्रावो, रविंद्र जडेजा, मोईन अली और सैम करन जैसे धाकड़ ऑलरांउडर मौजूद है. ऐसे में ये ऑलराउंडर्स टीम की स्ट्रेंथ माने जा रहे हैं.
कमजोरी
CSK टीम में उम्रदराज खिलाड़ी हैं और क्रिकेट के तेजतर्रार प्रारूप टी20 में यह उसकी कमजोरी साबित हो सकती है. धोनी, रैना, रायडू और ताहिर जैसे उसके खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके हैं और घरेलू क्रिकेट में भी नहीं खेलते. ऐसे में मैच अभ्यास की कमी टीम को भारी पड़ सकती है. चेन्नई का पेस अटैक इस सीजन एकबार फिर कमजोर नज़र आ रहा है. इस सीजन टीम के लिए तेज गेंदबाजी एक कमजोर पक्ष साबित हो सकती है. लुंगी एंगिडी की भी बात करें तो इंटरनेशनल लेवल पर उनकी फॉर्म कुछ ख़ास नहीं रही है. वहीं दीपक चाहर के पास वह पेस नहीं है. जिससे वह डेथ ओवरों में बल्लेबाजों पर दबाव बनाए सकें.
CSK को पिछले साल अपनी कमजोर बल्लेबाजी के कारण नुक़सान उठाना पड़ा था. यदि इस विभाग में उसने सुधार नहीं किया. तो फिर उसकी वापसी की संभावना कम हो जायेगी. यही नहीं टीम को जीत दिलाने के लिए उसके तेज गेंदबाजों को भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी. अब देखना दिलचस्प होगा की माही की कप्तानी वाली टीम पिछले सीजन के खराब प्रदर्शन से सबक लेकर एक बार फिर अपनी बादशाहत क़ायम करने में सफल हो पाती है या नहीं.