कप्तान ... यानि वो शख्स जो टीम को न सिर्फ फ्रंट से लीड करे, उसे मोटिवेट करे, बल्कि टीम का रोल मॉडल और संकट मोचक भी हो. जो टीम का ध्यान रखे, सबको साथ लेकर चले, चुनौतियों से डरे नहीं, तुरंत और अहम फैसले ले सके. भारतीय खेल में ऐसे ही कई कप्तानों ने सफलता की नई और ऐतिहासिक इबारतें लिखी हैं. आइए आज बात करते हैं भारतीय खेलों के ऐसे ही कमाल के कप्तानों की जिनकी अगुवाई में टीम इंडिया ने सफलता के झंडे गाड़े और देश का नाम रोशन किया.
महेंद्र सिंह धोनी- सबसे सफल कप्तान
भारतीय क्रिकेट में जब भी सबसे सफल कप्तानों की बात होगी तो महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) का नाम यकीनन टॉप पर होगा. साल 2007 से लेकर 2016 तक एमएस धोनी ने भारतीय क्रिकेट को बुलंदियों पर पहुंचा दिया. धोनी इकलौते कप्तान हैं, जिनकी कप्तानी में भारतीय टीम ने ICC की तीनों बड़ी ट्रॉफ़ी पर कब्ज़ा जमाया है. ICC वर्ल्ड T20 कप हो, क्रिकेट वर्ल्ड कप हो या फिर ICC चैंपियंस ट्रॉफ़ी.कैप्टन कूल की लीडरशिप में भारतीय टीम ने 2007, 2011 और 2013 में इन तीनों ट्रॉफियों पर कब्जा जमाया.
एमएस धोनी ने 60 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की है, इनमें से 27 जीते और 18 हारे, जीत का प्रतिशत रहा 45 का. उनका एकदिवसीय रिकॉर्ड और भी बेहतर रहा है, 59.52% के साथ माही ने 200 मैचों में से 110 में जीत दर्ज की है. वहीं 72 टी-20 मैचों में से धोनी एंड टीम को 41 मुकाबलों में जीत हासिल की.
मेजर ध्यानचंद- हॉकी के जादूगर
'हॉकी के जादूगर' कहे जाने वाले ध्यानचंद ने तीन ओलम्पिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया है, और तीनों बार ही देश को स्वर्ण पदक दिलाया है. ध्यानचंद की कप्तानी में भारत ने सन 1928, 1932 और 1936 में गोल्ड मेडल जीता. ध्यानचंद (Dhyan Chand) ने ओलंपिक खेलों में 101 गोल और अंतरराष्ट्रीय खेलों में 300 गोल दाग कर एक ऐसा रिकॉर्ड बनाया जिसे आज तक कोई तोड़ नहीं पाया है.
सौरव गांगुली- क्रिकेट के 'दादा'
BCCI के मौजूदा अध्यक्ष गांगुली को भारतीय क्रिकेट में जीत का जज्बा भरने के लिए जाना जाएगा. बेहद विपरीत परिस्थितियों में टीम की कमान संभाल गांगुली ने टीम को लड़ना सिखाया. शायद इसी बात का फायदा आज टीम को मिल रहा है.
उनकी कप्तानी में भारतीय टीम वर्ल्ड कप 2003 के फाइनल में पहुंची. वहीं दादा की कप्तानी में टीम इंडिया 2002 में चैंपियंस ट्रॉफी में संयुक्त विजेता और नेटवेस्ट ट्रॉफी की विजेता भी बनी. उन्होंने 49 टेस्ट में भारत का नेतृत्व किया, जिसमें से भारत ने 21 जीते और गांगुली ने 42.85 का जीत प्रतिशत हासिल किया. ODI मैचों में, भारतीय क्रिकेट के दादा ने 146 मैचों में टीम का नेतृत्व किया, जिसमें से भारत ने 76 जीते. क्रिकेट के इस प्रारूप में उनकी जीत प्रतिशत 53.52 था.
कपिल देव- महानतम ऑलराउंडर
25 जून का दिन भारतीय क्रिकेट के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज है. इसी दिन टीम इंडिया ने 38 साल पहले कपिल देव की कप्तानी में 1983 विश्व कप का खिताब जीतकर इतिहास रचा था.भारतीय टीम ने फाइनल में क्लाइव लॉयड के नेतृत्व वाली वेस्टइंडीज की टीम को हराया था. कपिल देव सबसे कम उम्र में वर्ल्ड कप जीतने वाले कप्तान हैं. भारत के सर्वकालिक महानतम ऑलरांउडर कपिल देव ने 34 टेस्ट में भारत की कप्तानी की और 4 टेस्ट जीते. वहीं 74 वनडे में उन्होंने भारत को 39 मैच जिताए.
मिताली राज- सबसे ज्यादा रन बनाए
मिताली एक ऐसी कप्तान रहीं है जिनकी वजह से महिला क्रिकेट वर्ल्ड में हिंदुस्तान के नाम की ताली बजती है. मिताली सबसे ज्यादा वनडे इंटरनेशनल जीतने वाली कप्तान हैं. इस मामले में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के ब्लेंडा क्लार्क का रिकॉर्ड तोड़ा है. वहीं मिताली राज (Mithali Raj) ने इंग्लैंड (England) की पूर्व कप्तान चार्लोट एडवर्ड (Charlotte Edwards) को पीछे छोड़ते हुए महिला इंटरनेशनल क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट में सबसे ज्यादा रन बनाने वाली क्रिकेटर बन गई हैं.
अजित वाडेकर-विदेश में जीतना सिखाया
अजित वाडेकर एक बेहतरीन बल्लेबाज और शानदार कप्तान रहे हैं, जिन्होंने हमारे क्रिकेट इतिहास को कई यादगार पल दिए. अजीत लगातार तीन टेस्ट सीरीज जीतने वाले भारत के पहले कप्तान थे. 1971-1974 के दौरान अजीत वाडेकर ने 16 टेस्ट मैचों में भारत की कप्तानी की. जिनमें से उन्होंने 4 टेस्ट जीते, इतने ही हारे और 8 टेस्ट ड्रॉ रहे.
सुनील छेत्री- सबसे ज्यादा गोल
सुनील छेत्री भारत के लिए सबसे अधिक अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले फुटबॉल खिलाड़ी हैं. 37 साल के छेत्री के नाम 118 मैच में 74 इंटरनेशनल गोल हैं और वह आज के दौर में सक्रिय फुटबॉलरों में सबसे ज्यादा गोल मारने के मामले में क्रिस्टियानो रोनाल्डो और लियोनल मेसी के बाद तीसरे नंबर पर हैं. वहीं छेत्री की कप्तानी में भारत के नाम लगातार 13 मैच में अपराजेय रहने का रिकॉर्ड है. साथ ही उनकी कप्तानी में टीम ने साल 2012 का नेहरू कप अपने नाम किया. वहीं उनकी कप्तानी में टीम ने 2019 AFC ASIA CUP के लिए क्वालिफाई भी किया.