दुनिया के महान सलामी बल्लेबाजों में शुमार सुनील गावस्कर 72 साल के हो गए हैं. लिटिल मास्टर का जन्म 10 दिसबंर 1949 को मुंबई यानी तब के बॉम्बे में हुआ था. गावस्कर ने दुनिया के बेहतरीन गेंदबाजों का सामना किया, डटकर किया और मजबूत तकनीक के दम पर बेखौफ होकर किया. गावस्कर जब तक मैदान पर रहे उन्हें तकनीक का बादशाह कहा जाता रहा और खेल को अलविदा कहने के बाद वे अपनी जबरदस्त कॉमेंट्री शैली के कारण बेहद चर्चित कमेंटेटर बन गए.
सुनील गावस्कर को लेकर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान कपिल देव ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि सिर्फ मैं या भारतीय क्रिकेटर ही नहीं बल्कि दुनिया का हर क्रिकेटर सुनील गावस्कर को अपना हीरो मानता था.
गावस्कर ने अपने करियर में 125 टेस्ट और 108 वनडे इंटरनैशनल मैच खेले हैं. सुनील गावस्कर ने 1971 से 1987 के बीच यानी 16 साल के अपने टेस्ट करियर में 34 शतकों के साथ 10,122 रन बनाए. उनकी बल्लेबाजी औसत 51.12 की रही. उनके 34 शतकों का रिकॉर्ड 2005 में सचिन तेंदुलकर ने तोड़ा था. गावस्कर ने 108 वनडे इंटरनेशनल में 35.13 की औसत से 3092 रन बनाए. वनडे में उनके बल्ले से एक ही शतक निकला, वो भी 107वें मैच में.
1971 में वेस्टइंडीज जैसी टीम को उसके घर में भारत ने न सिर्फ पहली बार मात दी, बल्कि कैरेबियाई धरती पर पहली बार सीरीज पर कब्जा भी जमाया. गावस्कर ने इस सीरीज में इतने रन बना डाले कि आज भी यह रिकॉर्ड बरकरार है. सुनील गावस्कर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ उस सीरीज में 4 टेस्ट मैचों में रिकॉर्ड 774 रन बनाए थे. जिसमें दोहरा शतक सहित 4 शतक और तीन अर्धशतक थे. यहीं से गावसकर का वेस्टइंडीज के साथ रोमांस शुरू हुआ. गावस्कर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ कुल 2749 रन बनाए हैं और 13 शतक जड़े हैं.
गावस्कर को उनके योगदान के लिए 1980 में पद्मभूषण से सम्मानित किया गया. इसके अलावा 1980 में ही उन्हें विजडन क्रिकेटर ऑफ द ईयर भी चुना गया. साल 2009 में वह ICC हॉल ऑफ द फेम में शामिल हुए और 2012 में उन्हें सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया. सुनील गावस्कर और एलन बॉर्डर के सम्मान में 1996 से भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच टेस्ट सीरीज को बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी का नाम दिया गया.
पूरी क्रिकेट बिरादरी जानती है कि 16 साल के क्रिकेट करियर में 'लिटिल मास्टर' की तकनीक का कोई मुकाबला नहीं था. भारतीय क्रिकेट में न जाने ऐसे कितने क्रिकेटर हैं, जिन्होंने गावस्कर की तकनीक का लोहा माना और अपने खेल में उसे शुमार किया. खुद क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर ने कहा था- मैं हमेशा उनके जैसा बनने की कोशिश करता रहा