सूंघने की क्षमता खो देना यानि Loss of smell कोरोनावायरस से संक्रमण के सबसे प्रमुख लक्षणों में से एक है. वैसे तो रिकवर होने पर दूसरे लक्षणों के साथ साथ इससे राहत तो मिल जाती है लेकिन कई लोग ऐसे भी है जो रिकवरी के बाद भी स्मेल नहीं आने की समस्या से परेशान हैं.
अगर आप भी सूंघने की परेशानी से जूझ रहे हैं तो ऐसे में एक्सपर्ट ने इसे वापस लाने के लिए स्टेरॉयड लेने की जगह 'smell training' की सलाह दी है.
चलिये अब बताते हैं कि क्या है स्मेल ट्रेनिंग? दरअसल, स्मेल ट्रेनिंग एक प्रक्रिया है जिसमें मरीज को कुछ महीनों तक दिन में दो बार चार अलग तरह की खुशबुओं को सूंघने की प्रैक्टिस करनी होती है
इंटरनेशलन फोरम ऑफ एलर्जी एंड रिनोलॉजी में छपी स्टडी में एक्सपर्ट्स टीम ने बताया है कि कोरोना से संक्रमित होने पर सूंघने की क्षमता खोने वाले हर 5 से एक ने रिपोर्ट किया है कि रिकवर होने के करीब 8 हफ्ते बाद भी उनकी सूंघने की क्षमता पूरी तरह से वापस नहीं आई है.
ऐसे मामलों में, कई डॉक्टर्स इसे कम करने के लिए दवाइयां और स्टेरॉयड लेने की सलाह दे रहे हैं लेकिन इनको लेने पर फ्लूइड रिटेंशन, हाई ब्लड प्रेशर, मूड स्विंग जैसे साइडइफेक्ट्स हो सकते हैं.
इसीलिए स्मेल ट्रेनिंग को सबसे बेहतर, सस्ता और साइड इफेक्ट से फ्री बेहतरीन विकल्प माना गया है. ये थेरेपी न्यूरोप्लास्टिक टेकनीक पर काम करती है जिसमें दिमाग कोई बदलाव और चोट लगने के बाद खुद से चीजों को पहचानने की कोशिश करता है.
स्टडी में शामिल प्रो फिल्पोट ने बताया कि उनके रिसर्च से ये पता चलता है कि 90% लोग 6 महीने बाद अपनी सूंघने की क्षमता को पूरी तरह से ठीक कर पाते हैं.