म्यांमार (Myanmar) में इन दिनों लोगों को कैश निकालने के लिए घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है, इसके बावजूद सभी को कैश नसीब (Cash crunch) नहीं हो रहा. भारत में भी साल 2016 में जगह जगह ATM के बाहर ऐसी ही तस्वीर दिख जाती थी, कारण था नोटबंदी. लेकिन म्यांमार में इस स्थिति के लिए नोटबंदी नहीं बल्कि आर्थिक तंगी जिम्मेदार है. दरअसल, 6 महीने पहले म्यांमार में सेना ने तख्तापलट कर दिया था, जिसके बाद से ही देश भयंकर आर्थिक संकट (Economic Crisis) से जूझ रहा है. देश में नकदी की कमी हो गई है, लोग बैंकों और एटीएम के बाहर घंटों तक लाइन (long queues) में खड़े रह रहे हैं. जिसे देखते हुए सरकार ने हर दिन प्रति व्यक्ति 9 हजार रुपये तक कैश निकालने की लिमिट तय कर दी है.
न्यूयार्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार म्यांमार की करेंसी क्याट का मूल्य भी डॉलर के मुकाबले 20 गुना गिर गया है. पूरे देश में 100 से भी कम एटीएम में कैश रहता है. जमाखोरी के कारण व्यपारी डिजिटल पेमेंट की बजाय नकद पैसे लेना चाहते हैं. आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक म्यांमार गंभीर वित्तीय संकट की ओर बढ़ रहा है, इसे जल्द ठीक करने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है. हालांकि, सरकार ने कहा है कि बहुत जल्द नोटों की समस्या दूर हो जाएगी और सबकुछ सामान्य हो जाएगा.