हाइपॉक्सिया (Happy Hypoxia) का मतलब है खून में ऑक्सीजन के लेवल का बहुत कम हो जाना. एक हेल्दी व्यक्ति की बॉडी में ऑक्सीजन सेच्युरेशन 95 % या उस से ज़्यादा होता है लेकिन कोरोना पेशेंट्स के खून में ये सेचुरेशन घट कर 50 % तक भी पहुंच जाता है.
हाइपॉक्सिया (Hypoxia) की वजह से किडनी, दिमाग और दिल के साथ साथ कई दूसरे बॉडी ऑर्गन्स काम करना बंद कर सकते हैं. ऐसे कोरोना मरीज़ों में शुरूआती स्तर पर कोई लक्षण नहीं नज़र आते और वो ठीक नज़र आते हैं. इस दौरान शरीर में वायरस लोड तो होता है और वो फेफड़ों को नुकसान भी पहुंचा रहा होता है.
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ऐसे में अगर ऑक्सीजन लेवल (Oxygen Level) पर नज़र ना रखी जाए तो काफी कम हो सकता है जिसकी वजह से अचानक सांस लेने में तकलीफ, घबराहट, चक्कर आना, पसीना आना और कई बार आंखों के आगे अंधेरा छा जाने जैसे लक्षण दिखाई देने लगते हैं. और एक दिन पहले तक स्वस्थ दिखने वाला मरीज़ अचानक वेंटीलेटर पर पहुंच जाता है.
1. अपनी बॉडी के छोटे छोटे संकेतों पर ध्यान दें.
2. हाइपॉक्सिया में होठों का रंग बदल कर हल्का नीले रंग का होने लगता है.
3. आपकी त्वचा का रंग भी हल्का लाल या बैंगनी होने लगता है.
4. बिना कारण पसीना आने लगता है.
युवाओं की इम्यूनिटी मज़बूत होती है और उनमें एनर्जी दूसरे लोगों के मुकाबले ज़्यादा होती है. अगर आपकी उम्र ज़्यादा है तो ऑक्सीजन सेचुरेशन थोड़ा सा भी कम होने पर मालूम होने लगता है जबकि युवाओं में कई बार सेचुरेशन 80 % से कम होने पर भी लक्षण नहीं पता चल पाते. इम्यूनिटी अच्छी होने के कारण वो कुछ हद तक हाइपॉक्सिया को सहन कर जाते हैं.
कोरोना के संक्रमण पर नजर डालें तो 85% लोगों में माइल्ड, 13% लोगों में मॉडरेट और 2% लोगों में गंभीर संक्रमण होता है. अपने सिम्पटम्स पर नज़र बनाये रखें और ऑक्सीमीटर का इस्तेमाल करते रहें.
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