CJI NV Ramana comments: देश के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमना ने बुधवार को एक लेक्चर के दौरान कहा कि देश में, कुछ वर्षों में केवल एक बार शासक बदलने का अधिकार अत्याचार के खिलाफ गारंटी (Guarantee against tyranny) नहीं है. अपने बयान में उन्होंने जोड़ा कि आलोचना और विरोध की आवाज लोकतांत्रिक प्रक्रिया (Democratic Process) का अभिन्न अंग हैं. जस्टिस पीडी देसाई मेमोरियल लेक्चर में ऑनलाइन बोलते हुए जस्टिस रमना ने कहा कि - यह हमेशा माना गया है कि हर कुछ वर्षों में शासक को बदलने का अधिकार अपने आप में निरंकुशता के खिलाफ गारंटी नहीं हो सकता.
उन्होंने कहा कि अब तक हुए सत्रह आम चुनावों में लोगों ने सत्ताधारी दल या पार्टियों को आठ बार बदला है और ये आंकड़ा आम चुनावों की संख्या का लगभग 50 प्रतिशत है. भारत जैसे देश में जहां बड़े पैमाने पर असमानता, अशिक्षा, पिछड़ापन, गरीबी और कथित अज्ञानता व्याप्त है, बावजूद इसके लोगों ने खुद को बुद्धिमान साबित किया है. देश की जनता ने अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से निर्वहन किया और अब उन लोगों की बारी है जो राज्य के प्रमुख अंगों का संचालन कर रहे हैं.