चार दिनों तक चलने वाले महापर्व छठ का दूसरा दिन खरना या लोहंडा का होता है. खरना का प्रसाद ग्रहण करने के बाद व्रती 36 घण्टों के निर्जला उपवास पर जाते हैं. प्रसाद के तौर पर गुड़ और अरवा चावल की बनी खीर, घी की रोटियां, केले और मेवे का भोग लगाया जाता है. व्रतियों के लिए ये प्रसाद एकांत में ग्रहण करने का विधान है.
शास्त्रों में षष्ठी देवी को ब्रह्मा जी की मानस पुत्री भी कहा गया है. पुराणों में इन्हें माँ कात्यायनी भी कहा गया है, जिनकी पूजा नवरात्रि में षष्ठी तिथि पर होती है.