असम के चुनावी मुद्दों को समझने के लिए सबसे पहले नागरिकता संशोधन एक्ट को समझना होगा. तकरीबन 15 महीने पहले संसद में लंबी बहस के बाद नागरिकता संशोधन एक्ट (citizen ammendment Bill) पारित कर दिया गया था और इसके खिलाफ गुवाहाटी समेत असम के दूसरे हिस्सों में विरोध प्रदर्शन भी हुआ था. जिसमें पुलिस की गोली से पांच लोग
मारे गए थे. प्रदर्शनकारियों ने उस वक्त कहा था कि सीएए (CAA) असम के मूल निवासियों की पहचान, भाषा और सांस्कृतिक धरोहर के खिलाफ है.
उस वक्त राज्य में सीएए को लेकर जो आशंकाएं थी, कांग्रेस (Indian National Congress) उसी नाराज़गी का चुनावी फायदा उठाने के मूड में दिख रही है.
कांग्रेस ने असम में अपने 5 गारंटी अभियान के तहत कहा है कि अगर वो सरकार में आई तो सीएए को रद्द करने के लिए कानून बनाएगी. सीएए विरोधी आंदोलन की याद में एक स्मारक बनाने का भी वादा किया गया है. कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी से लेकर प्रियंका गांधी तक हर कोई सीएए के मुद्दे को अपनी चुनावी सभा में जोरशोर से उठा रहा है.
वहीं बात बीजेपी की करें तो वो जानती है कि CAA का मसला राज्य के वोटरों के मद्देनज़र संवेदनशील है. इसलिए घोषणापत्र से लेकर चुनावी भाषणों में बार-बार 'असमिया अस्मिता' की बात की जा रही है. जानकार मानते हैं कि जिस तरह BJP कांग्रेस नेता तरुण गोगोई को
राज्य की अस्मिता की तरह पेश कर रही है, दरअसल ये सीएए के मुद्दे से उपजी नाराज़गी पर मरहम लगाने का ही एक तरीका हो सकता है. क्योंकि ये जगजाहिर है कि पिछला चुनाव बीजेपी ने गोगोई शासन में कथित रूप से हुए भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ा था..इसके अलावा
खैर अब कांग्रेस की ओर से चुनावी घोषणापत्र के दूसरे मुद्दे पर आते हैं
- कांग्रेस गृहणियों को हर महीने 2000 रुपये देने का वादा कर रही है
- हर परिवार को हर महीने 200 यूनिट बिजली मुफ्त देने की बात की जा रही है
- चाय बागान मजदूरों को न्यूनतम दिहाड़ी बढ़ाकर 365 रुपये करने का वादा किया जा रहा है
- अगले 5 सालों में युवाओं को 5 लाख सरकारी नौकरियों की भी बात कर रही है.
वहीं अगर बात बीजेपी के चुनावी वादों की करें तो पार्टी ने अपने संकल्प पत्र में जिन 10 बिंदुओं का जिक्र किया है, उनमें
- NRC को दुरुस्त किये जाने की बात है जिससे कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा हो सके
- अवैध तरीके से रह रहे लोगों को बाहर किया जाएगा
- 30 लाख परिवारों को अरुणोदय स्कीम के तहत कवर किया जाएगा
- योजना के तहत मिल रही मासिक राशि 830 रूपयों से बढ़कर 3000 की जाएगी
- आदिवासी समुदाय के पूजा स्थल को फिर से हासिल करने के लिए टास्क
फोर्स
-राजनीतिक अधिकारों की रक्षा के लिए परिसीमन को लेकर कदम उठाए जाएंगे
-बीजेपी असम के युवाओं को 2 लाख सरकारी नौकरियां देने की बात कर रही है.
कुल मिलाकर जिस तरह से कांग्रेस सीएए को लेकर अपने प्रचार में आक्रामक है और बीजेपी बार-बार असम अस्मिता की बात उठा रही है, उससे साफ है कि वोटिंग के दिन
भले ही सीएए का मुद्दा अहम साबित हो या ना हो, लेकिन चुनाव प्रचार मूलत इसी मुद्दे के इर्द गिर्द हो रहा है.