'शोले' जैसी अमर हिंदी फिल्म देने वाले रमेश सिप्पी 74 साल के हो गए. उनकी इस फिल्म से जुड़ा एक ख़ास किस्सा ये है कि वो इस फिल्म के अंत को बदलना चाहते थे. 15 अगस्त 1975 को रिलीज़ हुई शोले बॉक्स ऑफिस पर अच्छा नहीं कर रही थी. इसे लेकर जब सिप्पी ने फिल्म के लेखक सलीम-जावेद से बात कि तो उन्होंने कहा कि फिल्म के अंत में अमिताभ बच्चन के किरदार का मरना लोगों को पंसद नहीं आ रहा. फिल्म के शुरुआती दिनों के खराब प्रदर्शन पर इसके लेखकों के ऐसे कमेंट के बाद सिप्पी इसका अंत बदलना चाहते थे. हालांकि, उन्हें थोड़ा सा इंतज़ार करने की सलाह दी गई और कहा गया कि अगर थोड़े इंतज़ार के बाद भी फिल्म नहीं चली तो इसका अंत फिर से शूट करके इसमें डाल देंगे. सिप्पी ने इंतज़ार किया और उसके बाद फिल्म ने जैसा धमाका किया वो सब जानते हैं.