इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad Highcourt) ने राज्य में कोविड के हालात के मद्देनजर राज्य सरकार के इंतजाम पर कड़ी टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा की सूबे की स्वास्थ्य व्यवस्था राम भरोसे चल रही है और इसमें तत्काल सुधार की जरूरत है. दरअसल एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट के ध्यान मेंं मेरठ के अस्पताल में 64 साल के मरीज संतोष कुमार से जुड़ा केस सामने आया, जिसके मुताबिक संतोष अस्पताल में बेहोश होकर गिर गया और बाद में उसकी मौत हो गई. फिर स्टाफ आइसोलेशन वॉर्ड में मरीज की फाइल नहीं ढूंढ सका, जिसके बाद संतोष की लाश लावारिस मान ली गई.
हाईकोर्ट ने कहा कि हमें कहने में संकोच नहीं है कि शहरी इलाकों में स्वास्थ्य ढांचा बिल्कुल अपर्याप्त है और गांवों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में जीवन रक्षक उपकरणों की एक तरह से कमी है. सुनवाई के दौरान जस्टिस सिद्धार्थ वर्मा और अजित कुमार की पीठ ने राज्य सरकार को कई निर्देश दिए. कोर्ट ने कहा कि गांवों और कस्बों में सभी तरह की पैथॉलॉजी की सुविधा और कम्यूनिटी हेल्थ सेंटर्स में लेवल टू स्तर की चिकित्सा सुविधाएं मुहैया कराई जाएं, वहीं हर गांव में एम्बुलेंस हो और 30 बेड वाले नर्सिंग होम में ज़रूरीरूप से ऑक्सीजन प्लांट होना चाहिए.