दुनिया के राजनीतिक आंदोलनों के इतिहास में अबतक शायद ही किसी राजनीतिक दल ने इतनी ताकत हासिल की हो कि वो अपने देश के नागरिकों के जीवन के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करने की क्षमता रखता हो.जी हां हम बात कर रहे हैं चीन की सत्ताधारी पार्टी सीसीपी यानी चाइनीज कम्युनिस्ट पार्टी की जो गुरुवार 1 जुलाई को अपने 100 साल पूरे होने का जश्न मना रही है. चीन के बारे में कहा जाता है कि वहां से जितना सामने आता है, उससे कहीं ज्यादा छिपा होता है...मेनस्ट्रीम मीडिया हो या सोशल मीडिया, सब कुछ सरकार के नियंत्रण में है...लिहाजा इसी आलोक में एक नजर डालते हैं CCP के 100 साल के इतिहास पर
चोरी-छुपे हुई थी CCP की स्थापना
फर्स्ट वर्ल्ड वॉर के बाद चीन में कम्युनिस्ट आंदोलन की सुगबुगाहट
बीजिंग में हुआ मशहूर '4 मई आंदोलन', छात्रों पर तत्कालीन सरकार का दमन
ब्लादिमीर लेनिन से प्रभावित होकर शंघाई प्रांत में हुई CCP की स्थापना
1 जुलाई 1921 को गुप्त रुप से CCP की हुई स्थापना
माओत्से तुंग, चेन डुक्सियू, झोउ एनलाई और ली डाझाओ ने संस्थापक सदस्य
जब पार्टी बनी तो सिर्फ 50 लोगों ने इसकी सदस्यता ली थी
1 अक्टूबर 1949 सिविल वॉर के बाद पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना बना
उस वक्त तक CCP में 2.2 करोड़ लोग मेंबर बन चुके थे
चीन में CCP के वर्तमान स्थिति को जानिए
CCP में इस वक्त 3 विंग हैं, इन्हें क्लास भी कहा जाता है
ये हैं- फार्मर्स, वर्कर्स और सोल्जर्स, इसी आधार पर बनते हैं मेंबर
पार्टी का सदस्य बनने के लिए 20 स्टेप्स को पूरा करना होता है
CCP के वर्तमान में 9.20 करोड़ सक्रिय सदस्य हैं
पोलित ब्यूरों में 25 सदस्य हैं, नेशनल पार्टी कांग्रेस में 200 सदस्य
चाइना कम्युनिस्ट पार्टी ने चीन को चमत्कारी उपल्बधियां दिलाई हैं...लेकिन अपनी स्थापना के बाद से ये पार्टी विवादों में रही है..दमनकारी नीति को हथियार बना कर इसने लंबा सफर तय किया है...इस पर एक निगाह डाल लेते हैं.
क्रांति के नाम पर CCP ने किया 'दमन'
कोरियाई जंग में अपने सैनिक भेजे, एक लाख से ज्यादा मारे गए
माओत्से तुंग ने शुरू की औद्योगिक क्रांति, द ग्रेट लीप फॉर्वर्ड' था नाम
1958 से 1962 के दौरान करीब 5 करोड़ लोगों की भूख से मौत की आशंका
एक दशक तक चली सांस्कृतिक क्रांति में भी करीब 2 करोड़ लोगों ने गंवाई जान
बहरहाल इन तमाम विवादों के बावजूद CPP ने चीन को बुलंदियों तक पहुंचाया है. साल 2010 में ही जापान को पछाड़कर चीन दुनिया में दूसरी आर्थिक महाशक्ति बन गया. आज अमेरिका के बाद चीन की दुनिया की महाशक्ति समझा जाता है.