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दिल के तार बजाने वाला संगीतकार

Sep 21, 2019 01:51 IST

अपने सदाबहार गानों के लिए मशहूर संगीतकार खय्याम हमेशा के लिए खामोश हो गए. लेकिन, वो छोड़ के गए हैं कुछ सदाबहार गाने, जो अमर हैं...साल 1927 में पंजाब में जन्मे ख्याम ने बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत 1953 में फुटपॉथ फिल्म से की थी...जिसके बाद वे आधी सदी से ज्यादा वक्त तक बॉलीवुड पर राज करते रहे...फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड्स , हृदयनाथ मंगेशकर अवॉर्ड, संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड और पद्म भूषण अवॉर्ड भी ख्याम की झोली में आए...आइए सुनते हैं खय्याम के कुछ दिलकश गाने 

सबसे पहले बात करते हैं इंडियन सिनेमा के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना की डेब्यू फिल्म'आखरी ख़त' के गाने 'बहारो मेरा जीवन भी संवारो' की. इस बेहतरीन गाने की लिरिक्स मशहूर शायर कैफीआज़मी ने लिखी थी. आप भी  सुनिए लता मंगेशकर की आवाज़ में ये गाना 
राज कपूर और  माला सिन्हा स्टारर 'फिर सुबह होगी' के  समय खय्याम  का  म्यूज़िक कम्पोज़िशन में करियर शुरू ही हुआ था. ऐसे में  मशहूर गीतकार साहिर लुधियानवी ने खय्याम की सिफारिश की, और फ़िल्मी दर्शकों को मिला ' वो सुबह कभी तो आएगी जैसा सदाबहार गाना  

खय्याम ने अमिताभ बच्चन  की फिल्म 'कभी कभी'  को भी शानदार म्यूज़िक दिया। फिल्म के लिए खय्याम  को बेस्ट म्यूज़िक कम्पोज़र का   फिल्म फेयर अवॉर्ड  भी मिला था.
 रेखा की फिल्म 'उमराव जान' का गाना 'इन आंखों की मस्ती के' तो आपने सुना ही  होगा।  पर क्या आप जानते हैं कि ये गाना उतना बेहतरीन नहीं हो पता यदि खय्याम ने उसे म्यूजिक नहीं दिया होता
 1981 में  खय्याम की तीन एल्बम  सुपर हिट रहीं। इन्ही में से है एक गाना  ''कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता', जो आज भी लोग गुनगुनाते रहते हैं 

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