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अलविदा! चौधरी अजित सिंह

May 06, 2021 13:15 IST | By Editorji News Desk


पश्चिमी यूपी में किसानों की आवाज रहे अजित सिंह अजीत सिंह न केवल सफल राजनेता रहे बल्कि वे एक अच्छे स्कॉलर भी थे. उन्होंने देश के नामी आईआईटी खड़गपुर से कंप्यूटर साइंस
में बीटेक की डिग्री हासिल की. इसके बाद इलेनॉइस इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एमएस की डिग्री हासिल की. अजीत सिंह पहले भारतीय थे जिन्होंने 1960 के दशक में बिल गेट्स की आईबीएम कंपनी में नौकरी की

-  साल 1986 में अपने पिता और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के  बीमार पड़ने के बाद अजित सिंह ने राजनीति में कदम रखा था

- वो 1986 में वो पहली बार राज्य सभा के सदस्य बने.

- साल 1989 में बागपत से वो लोकसभा का चुनाव जीते और वीपी सिंह की सरकार में उद्योग मंत्री बनाए गए थे.
- 1991 के लोकसभा चुनाव में भी उन्होंने जीत हासिल की और पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में भी मंत्री बनाए गए थे, यहां वो खाद्य् मंत्री बनाए गए

- साल  1999  में उन्होंने लोकदल का गठन किया.


अजित सिंह के बारे में कहा जाता था कि उन्होंने ज्यादातर उन पार्टियों के साथ गठबंधन किया, जिनके जीतने के चांस ज्यादा रहे हों 

- 2001 से 2003 के बीच अजित सिंह अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में कृषि मंत्री थे.

- 2011 में उनकी पार्टी तत्कालीन सत्तारूढ़ यूपीए में शामिल हो गई और उन्हें नागरिक उड्डयन मंत्रालय का जिम्मा सौंपा गया था.

- 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में उनको भाजपा के उम्मीदवार से हार का सामना करना पड़ा. 

अजित सिंह का पश्चिमी यूपी में अच्छा खासा प्रभाव रहा है लेकिन पिछले 2 लोकसभा और 2 विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी का ग्राफ तेजी से गिरा. वो बागपात से 7 बार चुनाव जीते 1989 से लेकर 2009 तक जितने भी चुनाव हुए अजीत सिंह जीतते रहे. 2014 में उन्हें पहली बार हार का सामना करना पड़ा जब बीजेपी के सतपाल मालिक ने उन्हें हराया.  इसके बाद उन्होंने 2019 में मुजफ्फरनगर से लोकसभा का चुनाव लड़ा. इस बार उन्हें बीजेपी के संजीव बालियान ने हराया. 

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