World Down Syndrome Day 2021: क्या होता है डाउन सिंड्रोम, बच्चे की सही केयर है इसका इलाज - World Down Syndrome Day 2021: क्या होता है डाउन सिंड्रोम, बच्चे की सही केयर है इसका इलाज | Editorji Hindi
  1. home
  2. > लाइफ़स्टाइल
  3. > डाउन सिंड्रोम को समझें, ऐसे बच्चों को प्यार दें
prev iconnext button of playermute button of playermaximize icon
mute icontap to unmute
video play icon
00:00/00:00
prev iconplay paus iconnext iconmute iconmaximize icon
close_white icon

डाउन सिंड्रोम को समझें, ऐसे बच्चों को प्यार दें

Mar 21, 2021 00:08 IST | By Editorji News Desk

डाउन सिंड्रोम एक कंडीशन है, ये बाई बर्थ होता है यानि जन्म के साथ. इसमें बच्चों का फिजिकल और मेंटल डेवलपमेंट ठीक से नहीं होता, लिहाजा खासकर उनका चेहरा थोड़ा अलग दिखता है और वो आम बच्चों की तरह बर्ताव नहीं करते. हमारे देश में मेंटल हेल्थ को लेकर अवेयरनेस बहुत कम है, लिहाजा जरूरी है कि हम पहले लोगों को ये बताएं कि आखिर डाउन सिंड्रोम है क्या. ताकि लोग वाहियात सवाल न करें और न ही इन बच्चों को ऐसे देखें जैसे वो कोई एलियन हों.  

क्या होता है डाउन सिंड्रोम? 

डाउन सिंड्रोम एक जेनेटिक डिसऑर्डर है 

इसका गहरा मेंटल, फिजिकल और साइकोलॉजिकल असर होता है 

दुनियाभर में हर 1000 में से 1 बच्चा डाउन सिंड्रोम से ग्रसित होता है

फिजिकल कंडीशन की बात करें तो इसमें मसल्स मजबूत नहीं होते जिससे एक्टिविटी में दिक्कत होती है. आंख और नाक की बनावट कुछ अलग होती है, कई बार जीभ और होठ मोटे होते हैं. कई केस में गर्दन, कान या हाथ छोटे होते हैं तो सिर चपटा होता है. 

मेंटल कंडीशन की बात करें तो डाउन सिंड्रोम वाले बच्चों का IQ 50 से भी कम होता है, जबकि नॉर्मल बच्चों में ये 100 के आसपास रहता है. वक्त के साथ ऐसे बच्चों का IQ और कम होता जाता है. इन्हें बोलने में दिक्कत होती है, ये इंपल्सिव होते हैं और अटेंशन स्पैन बहुत ही कम होता है. 

अब बात करते हैं वजह की, आखिर क्यों होता है डाउन सिंड्रोम ? 

- जिस बच्चे में 47 क्रोमोज़ोम होते हैं तो उसे डाउन सिंड्रोम होता है

- हर हेल्दी बच्चे में 46 क्रोमोज़ोम होते हैं, 23 मां से और 23 पिता से 

- ज्यादा उम्र में बच्चा होने पर डाउन सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है 

- आनुवांशिक भी होता है 

– भारत में हर 700 में से 1 बच्चा डाउन सिंड्रोम का शिकार 

अब बात करते हैं इलाज की, क्या इसका कोई इलाज है? 

- अफसोस ये है कि इसका इलाज नहीं है

- ये एक सिंड्रोम है मतलब कई लक्षणों का मिश्रण 

- इसमें सिर्फ symptom के हिसाब से इलाज होता है 

- कई तरह की थेरेपीज होती हैं जैसे फिजिकल, ऑक्यूपेशनल और Behavioural 

ऐसे बच्चों की थेरेपी जितनी जल्दी शुरू की जाए और जितनी लगातार हो उतना अच्छा है, इससे इन्हें इंडिपेंडेंट बनाने में मदद मिलती है. खास बात ये है कि इस सिंड्रोम से पीड़ित बच्चे पढ़-लिख सकते हैं और आम बच्चों की तरह स्कूल भी जा सकते हैं. भले ही विकास बहुत धीरे हो, लेकिन आम लोगों की तरह जीवन जी सकते हैं. जरूरत उन्हें प्यार, अपनापन और देखभाल की है।

लाइफ़स्टाइल