Ramadan 2021: Know the significance of fasting in the month of Ramadan - Ramadan 2021: जानिये रमज़ान में सहरी और इफ्तार का क्या होता है खास महत्व | Editorji Hindi
  1. home
  2. > लाइफ़स्टाइल
  3. > Ramadan 2021: जानिये रमज़ान में सहरी और इफ़्तार का क्या है महत्व
prev iconnext button of playermute button of playermaximize icon
mute icontap to unmute
video play icon
00:00/00:00
prev iconplay paus iconnext iconmute iconmaximize icon
close_white icon

Ramadan 2021: जानिये रमज़ान में सहरी और इफ़्तार का क्या है महत्व

Apr 15, 2021 16:37 IST | By Editorji News Desk

रमज़ान इस्लाम धर्म के सबसे पाक और अहम महीनों में से एक है. मुस्लिम समुदाय के लोग साल भर रमज़ान के महीने का बेसब्री से इंतजार करते हैं, क्योंकि रमज़ान के महीने में की गई इबादत का सवाब आम दिनों के मुकाबले बहुत ज्यादा होता है. मुस्लिम समुदाय के लोग रमज़ान के पूरे महीने (29 या 30 दिन) तक रोज़ा रखते हैं, नमाज़ पढ़ते हैं और क़ुरान की तिलावत करते हैं. माना जाता है कि रमज़ान के महीने में अल्लाह अपने बंदों की हर जायज़ दुआ कुबूल करता है और उनको गुनाहों से बरी करता है. यही वजह है कि इस महीने में लोग इबादत करने के साथ-साथ अल्लाह से अपने गुनाहों की दिल से तौबा भी करते हैं.

रमज़ान में क़ुरान पढ़ने की अहमियत
इस्लाम में रमज़ान के पाक महीने में रोज़ा रखने और नमाज़ पढ़ने के साथ क़ुरान पढ़ने की भी काफी फ़ज़ीलत बताई गई है. रमज़ान के महीने में ही 21वें रोज़े के दिन पैग़ंबर हज़रत मोहम्मद साहब पर अल्लाह ने ‘क़ुरान शरीफ' नाजिल किया था, यानी कुरान अस्तित्व में आया था. इसलिए इस महीने में कुरान पाक की ज्यादा से ज्यादा तिलावत की जाती है.

क्या होती है सहरी और इफ्तार?
रमज़ान में रोज़े की शुरुआत सुबह सहरी से शुरू होती है, जब सूर्योदय से पहले कुछ हल्का फुल्का खाकर रोज़ा यानि फास्टिंग की शुरुआत की जाती है. यानि सहरी सुबह सूरज निकलने से पहले खाए गए खाने को कहते हैं. सहरी करना सुन्नत है, इसका भी सवाब मिलता है.

रोज़ा खत्म किया जाता है शाम में सूरज ढलने पर, रोज़ा खोलने को यानि फास्टिंग तोड़ने को इफ़्तार कहते हैं. इफ्तार करने से ठीक पहले की दुआ बहुत जल्द कुबूल होती है. वजह है दिन भर का भूखा सामने खाना रखा होने के बावजूद उसे खाने की बजाय दुआ में मशगूल होता है, ये उसके devotion का पीक होता है इसलिए इस समय की वाजिब और दिल से मांगी गई दुआ जल्द कुबूल होती है. 

लाइफ़स्टाइल