समलैंगिकता पर बात करती फिल्में

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समलैंगिकता पर बात करती फिल्में

Feb 21, 2020 16:15 IST

आयुष्मान खुराना की 'शुभ मंगल ज़्यादा सावधान' सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. ये फिल्म लाइट हूयमर के ज़रिये दर्शकों तक एक होमोसेक्सुअल कपल की कहानी बताती है. लेकिन आयुष्मान पहले ऐसे एक्टर नहीं हैं जो बड़े पर्दे पर समलैंगिक किरदार निभा रहे हैं. इससे पहले भी हिंदी सिनेमा की ऐसी बहुत सी फ़िल्में हैं जिन्होंने खुलकर समलैंगिकता के बारे में बात की है. जहां इनमें से कुछ फिल्मों को भारी विरोध का सामना करना पड़ा वहीं कुछ फिल्मों की क्रिटिक ने काफी तारीफ़ की. आइये बात करते हैं उन फिल्मों की जिन्होंने संजीदगी से समलैंगिकता के विषय पर बात की दीपा मेहता की 1996 में आई फिल्म 'फायर' को रिलीज़ होने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. शबाना आज़मी और नंदिता दास स्टारर 'फायर' कहानी है राधा और सीता के प्यार की. फिल्म के रिलीज़ के वक्त काफी विरोध हुआ था, हालांकि सबने शबाना आज़मी और नंदिता के काम की तारीफ की थी. 2005 में आई डायरेक्टर ओनिर की फिल्म ' माय ब्रदर निखिल' समलैंगिकता के साथ-साथ HIV के बारे में भी बात करती है. सजंय सूरी, पूरब कोहली और जूही चावला स्टारर इस फिल्म को अपने प्रोग्रेसिव स्टोरी लाइन के लिए काफी सरहाना मिली थी. 2015 में आई हंसल मेहता की, मनोज बाजपेयी और राजकुमार राव स्टारर ' अलीगढ' एक रियल स्टोरी पर बेस्ड फिल्म है. फिल्म में मनोज बाजपेयी अलीगढ विश्विद्याला के प्रोफेसर का किरदार निभाते हैं, जिन्हे समलैंगिक होने की वजह से यूनिवर्सिटी से निकाल दिया गया था. करण जौहर के प्रोडक्शन में बनी फिल्म 'कपूर एंड संस' में फवाद खान एक गे लड़के का किरदार निभा रहे हैं. फिल्म में एक सीन है जिसमें फवाद अपनी मां को अपनी समलैंगिकता के बारे में बताते हैं. फवाद खान और रत्ना पाठक शाह पर फिल्माया गया ये सीन काबिल- ए- तारीफ है सबसे आखिर में है सोनम कपूर की 'एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा' . सोनम कपूर और अनिल कपूर स्टारर ये फिल्म कहानी है एक लकड़ी की जिसने अपने परिवार से छुपा रखा है की वो लेस्बियन है. स्टोरी में ट्विस्ट तब आता है जब सोनम के परिवारवालों को उनकी समलैंगिकता के बारे में पता लगता है.

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