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मेवालाल चौधरी का विवादों से है पुराना नाता

Nov 20, 2020 02:43 IST

मेवालाल चौधरी, तीन दिन पहले जब नीतीश सरकार के शपथ ग्रहण में मेवालाल चौधरी को मंच पर देखा तभी से जैसे विवादों और आलोचनाओं का एक सिलसिला सा चल पड़ा. इन तीन दिनों में विपक्ष खासकर आरजेडी की ओर से मेवालाल चौधरी को लेकर नीतीश कुमार पर खासा दबाव बनाया गया. भ्रष्टाचार और दागी बैकग्राउंड को लेकर आरजेडी ने नीतीश पर दबाव डाला कि वो मेवालाल से जुड़े मामलों की जांच करवाएं. दबाव बढ़ा और नतीजा सबके सामने आ गया.बतौर शिक्षा मंत्री मेवालाल ने कार्यभार संभाले सिर्फ डेढ़ घंटा हुआ था, घर पर अभी मंत्री की नेमप्लेट तक नहीं लगी थी और पद से इस्तीफा देना पड़ गया, सूत्रों के मुताबिक नीतीश कुमार के कहने पर ही उन्होंने अपना पद छोड़ा, ज़रा समझने की कोशिश करते हैं कि आखिरकार वो सारे मामले आखिर हैं कौन से जिनकी वजह से मेवालाल चौधरी इतने विवादों के घेरे में हैं. दरअसल मेवालाल चौधरी पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप हैं. मेवालाल पर असिस्टेंट प्रोफेसर और जूनियर वैज्ञानिकों की नियुक्ति में अनियमितता बरतने के आरोप हैं. वो विधायक बनने से पहले सबौर स्थित बिहार कृषि विश्वविद्यालय के साल 2010-2015 तक वाइस चांसलर रहे हैं. कुलपति रहते कृषि विश्वविद्यालय में साल 2012 में सहायक प्राध्यापक और जूनियर वैज्ञानिकों की बहाली हुई थी. बताया जाता है कि उस नियुक्ति में धांधली की गई थी. घोटाले का मामला सबौर थाने में 2017 में दर्ज किया गया था, हालांकि इस मामले में उन्होंने कोर्ट से अग्रिम जमानत मिल गई थी और अभी तक कोर्ट में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है. ये तो बात हुई 2017 यानि तीन साल पहले की अब बात करते हैं पिछले साल यानि 2019 की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ दास ने बिहार के डीजीपी को एक चिट्ठी लिखी है . इस चिट्ठी में दास ने चौधरी की पत्नी नीता चौधरी की मौत से जुड़ा मामला उठाया है. 27 मई 2019 को नीता चौधरी अपने आवास पर बुरी तरह जल गईं थीं और 2 जून 2019 को नीता चौधरी की मौत हो गई थी. अमिताभ दास का कहना है कि उन्हें सूचना मिली है कि उनकी मौत के पीछे कई परतें हैं और नीता चौधरी की मौत का संबंध पति मेवालाल के नियुक्ति घोटाले से हो सकता है. ज़ाहिर है मेवालाल चौधरी पर लगे आरोप बेहद संगीन हैं ,इसीलिए बुधवार को उनकी सीएम नीतीश कुमार के साथ हुई मुलाकात पर सबकी निगाहें लगी हुई थी, विपक्ष के दबाव के बीच इस बैठक को खासा अहम माना जा रहा था और 24 घंटे बीतते बीतते मेवालाल ने पद ही छोड़ दिया.

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