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मातृभाषा दिवस

Feb 27, 2020 16:15 IST

मातृभाषा दिवस यानी एक ऐसा दिन जो समर्पित है अपनी मां बोली के नाम. उस जुबान के नाम जो मां से हमें मिली और जिसमें हमने अपने जीवन का पहला वाक्य बोला. संयुक्त राष्ट्र की पहल पर साल 1999 से इस दिन को मनाए जाने की शुरुआत हुई. ये दिवस यूं तो पूरी दुनिया में मनाया जाता है, लेकिन भारत के लिए इसका महत्व अलग है. दुनिया में हिंदुस्तान की पहचान भाषा और बोलियों के देश के रूप में रही है और तभी यहां के बारे में कहा जाता है कि कोस कोस पर बदले पानी, चार कोस पर बदले वाणी. चार कोस मतलब करीब हर 36 किलोमीटर के बाद आपको भारत में बोली में परिवर्तन नजर आएगा. एक समय में भारत में 780 से ज्यादा बोलियां चलन में थीं, लेकिन समय के साथ इनमें से कई लुप्त हो गईं और अब केवल 500 ही चलन में हैं. संकट यहीं खत्म नहीं होता, जानकारों के मुताबिक बची हुई बोलियों में से भी अधिकतर अब धीरे धीरे लुप्त हो रही हैं, और लोग एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को इसे नहीं सौंप रहे. -- भारतीय भाषाओं की बात करें तो सबसे ज्यादा हिंदी बोली जाती है, दुनिया में करीब 62 करोड़ लोग हिंदी बोलते हैं और यह दुनिया की तीसरी सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा है. -- हिंदी के बाद सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भारतीय भाषा है बंगाली. दुनियाभर में करीब 21.5 करोड़ लोग यह भाषा बोलते हैं और नेटिव भाषाओं में ये दुनियाभर में 7 वें नंबर पर है -- उर्दू 16.32 करोड़ लोग दुनिया भर में बोलते हैं और दुनिया में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषाओं में यह 11वें पायदान पर है. -- पंजाबी 88 मिलियन लोग बोलते हैं और ये दुनिया की सूचि में 11वें पायदान पर है -- तेलुगु 75 मिलियन लोग बोलते हैं और यह 15वें नंबर पर है -- मराठी 71 मिलियन लोग बोलते हैं और यह 16वें नंबर पर है -- तमिल 77 मिलियन लोग बोलते हैं और यह 17वें नंबर पर है

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