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कोरोना: कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के शोध में 'जान और जहान' की चिंता एक साथ

May 21, 2020 23:01 IST

दुनिया के विभिन्न देशों में कोरोना संकट के कारण घोषित लॉकडाउन को धीरे-धीरे खोला जा रहा है. माना जा रहा है कि लॉकडाउन खोलने से ठप हो चुकी आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी. इस बीच कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के एक नए शोध में लॉकडाउन को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिया गया है. कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के प्रमुख शोधकर्ता डॉक्टर राजीव चौधरी ने कहा कि 2022 तक दुनिया को रुक-रुककर लॉकडाउन की जरूरत है. इसके तहत 30 दिन काम करने के बाद 50 दिन लॉकडाउन में रहने का नियम बनाना पड़ेगा. इस रिसर्च की थीम जान और जहान दोनों को महफूज रखना है. आइए आपको बताते हैं इस चिसर्च में आखिर है क्या? - 30 दिन काम और 50 दिन लॉकडाउन से कोरोना वायरस के संक्रमण की वजह से होने वाली मौत की तादाद तेजी से घटेगी. - क्योंकि ऐसा करने से कोरोना वायरस के संक्रमण की चेन टूट जाएगी . साथ ही हर 50 दिन के बाद 30 दिन की छूट से सरकारों को अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने का मौका भी मिलेगा. - एक बार लंबा लॉकडाउन लागू करना और बाद में अचानक पाबंदियों को हटा लेने से हालात आगे चलकर फिर बिगड़ सकते हैं - लॉकडाउन को लागू करना और इसे हटाने को रुटीन के तौर पर लागू किया जाना चाहिए. - अगर 50 दिन के लॉकडाउन और 30 दिन की छूट के फॉर्मूले को लगातार 18 महीने तक अपनाने से सिर्फ 1 लाख 30 हजार लोगों की मौत की आशंका होगी. - इस रणनीति का उपयोग करने से न सिर्फ मौतें कम होंगी बल्कि आर्थिक परेशानियां और मानसिक संकट भी काफी हद तक दूर होगा. - यह रणनीति मौजूदा तरीकों की तुलना में अधिक टिकाऊ है जो वायरस के व्यक्ति-से-व्यक्ति प्रसार को कम करता है.

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