Clinical Examination for the women of every age - महिलाएं हर उम्र में रखें अपना ख्याल, 20 से 40 की उम्र में ज़रूर करवाएं ये मेडिकल टेस्ट | Editorji Hindi
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महिलाएं हर उम्र में रखें अपना ख्याल, 20 से 40 की उम्र में ज़रूर करवाएं ये मेडिकल टेस्ट

Apr 13, 2021 18:34 IST | By Editorji News Desk

ऑफिस से लेकर घर का काम, बाजार से ग्रोसरी की शॉपिंग हो या घर के बिल्स भरने की बात, घर के बुज़ुर्गों की डॉक्टर से अपॉइंटमेंट की तारीख हो या बच्चों की फ़ूड चॉइसेस, एक महिला इन सब चीज़ों का ध्यान रखती है. लेकिन इन सब के बीच एक बात जो वो नज़रअंदाज़ कर देती हैं वो है उनकी खुद की सेहत. स्वास्थ्य से जुड़ी ज़्यादातर परेशानियों को सीरियसली ना लेना लगभग हर महिला की आदत का हिस्सा बन गया है. हमारे घर में और हमारे आसपास हम जितनी भी महिलाओं से मिलते हैं वो स्वास्थ्य-संबंधी ज़्यादातर परेशानियों को या तो घरेलू नुस्खों से ठीक करने की कोशिश करती हैं या फिर पेनकिलर खा कर. और ये कहानी हर पीढ़ी की महिला की है. अफ़सोस की बात तो ये है कि नई पीढ़ी की महिलाओं का भी एक छोटा सा ही हिस्सा है जो अपनी सेहत को लेकर जागरूक है. हम अपनी मम्मी, दादी और नानी को तो अक्सर ये सलाह देते हैं कि छोटी छोटी चीज़ों को नज़रअंदाज़ ना करें और समय समय पर जाकर अपना हेल्थ चेक उप करवाते रहे. लेकिन जब खुद की बात आती है तो हम वही कर रहे होते हैं जो हमारी मम्मी और दादी नानी करते आये हैं ............इग्नोर............. महिलाओं की यही लापरवाही आदमियों के मुकाबले उनकी कम लाइफ एक्सपेक्टेंसी की सबसे बड़ी वजह है. कोई भी बीमारी पहले से बता कर नहीं आती है इसलिए सावधानी बरतना और हर सिचुएशन के लिए तैयार रहना बहुत ज़रूरी है. आप इस गलतफहमी में बिल्कुल ना रहें कि अगर आपकी उम्र कम है तो आपको कोई बीमारी नहीं हो सकती. हर उम्र में बॉडी अलग अलग चैंजेस से गुजरती है और हर फेज में बॉडी को अलग तरह की केयर की ज़रूरत होती है. यहां हम ऐसे ही कुछ मेडिकल टेस्ट्स का ज़िक्र कर रहे हैं जिन्हें सभी औरतों को उम्र के अलग-अलग पड़ाव पर करवाते रहना चाहिए.

20 से 30 की उम्र के बीच करवाएं ये टेस्ट

20 से 30 साल के बीच का समय हर किसी की लाइफ का गोल्डन पीरियड होता है. ये वो वक्त होता है जब आप अपने करियर पर फोकस करती हैं, अपने पैरों पर खड़ी होती हैं, प्यार में पड़ती हैं और कुछ लोग मैरिड लाइफ में भी कदम रखते हैं. आप बेशक इस दौरान एनर्जी और एक्साइटमेंट से भरी होती हैं लेकिन इस सबके चक्कर में अपनी सेहत को नज़रअंदाज़ करना समझदारी नहीं है. 20 से 30 की उम्र के बीच हर लड़की को ये टेस्ट्स ज़रूर करवाने चाहिए-

पैप स्मियर और पेल्विक एग्ज़ाम- 20 की उम्र के बाद साल में एक बार पैप स्मियर टेस्ट ज़रूर करवाना चाहिए. पैप स्मियर टेस्ट में सर्वाइकल कैंसर के लक्षणों का पता लगाया जाता है. अगर आपके शुरू के तीन पैप स्मियर टेस्ट्स के रिज़ल्ट नेगेटिव आते हैं तो उन्हे देखते हुए आपका डॉक्टर इन टेस्ट्स के अंतराल को बढ़ा सकता है, यानि कि साल में एक बार ये टेस्ट करवाने की जगह हो सकता है कि आपको दो साल या तीन साल में एक बार ये टेस्ट करवाना पड़े.

आई टेस्ट - काम से लेकर एंटरटेनमेंट तक और शॉपिंग से लेकर बैंकिंग तक, हमारे सभी ज़रूरी काम जेट्स के भरोसे ही होते हैं. यही वजह है कि इस दौरान आंखों का कमज़ोर होना बहुत ही आम है. इसलिए साल में एक बार आई टेस्ट ज़रूर करवाएं या फिर जब भी आंखों में जलन, भारीपन या धुंधलापन महसूस हो तो डॉक्टर के पास ज़रूर जाएं.

डेंटल चेकअप- ये वो उम्र होती है जब हम में से ज़्यादातर लोग जंक फूड पर जीते हैं, जिसका सीधा असर हमारे दांतों पर पड़ता है. इसके लिए 6 महीने में एक बार या कम से कम साल में एक बार डेंटल चेकअप ज़रूर करवाएं. ऐसा करने से दांतों में कैविटी या मसूड़ों में इन्फेक्शन का समय रहते पता चल जाता है और इनका इलाज किया जा सकता है .

एसटीडी स्क्रीनिंग- अगर आप इस उम्र में सेक्शुअली एक्टिव हैं तो आपको एसटीडी यानि कि सेक्शुअली ट्रांसमिटेड डिज़ीज़ (यौन रोग) की स्क्रीनिंग ज़रूर करवानी चाहिए. इससे समय रहते छोटी-बड़ी कई बीमारियों का पता लगा कर ज़रूरत पड़ने पर इलाज किया जा सकता है.

ब्रेस्ट एग्ज़ामिनेशन- पहले माना जाता था कि ब्रेस्ट एग्ज़ामिनेशन या स्क्रीनिंग की ज़रूरत 30 की उम्र के बाद ही पड़ती है. मगर पिछले कुछ समय में देखा गया है कि 30 से कम उम्र वाली कई महिलाओं में भी ब्रेस्ट कैंसर के लक्षण पाए गए हैं. इसलिए सावधानी के तौर पर अब कम उम्र की महिलाओं को भी ब्रेस्ट स्क्रीनिंग या एग्ज़ामिनेशन की सलाह दी जाती है अगर आप क्लिनिकल चेकअप नहीं करवाना चाहती तो हर महीने खुद ही शीशे के सामने खड़ी होकर अपने दोनों ब्रेस्ट चेक करें और किसी भी तरह की गांठ, घाव या दर्द महसूस होने पर डॉक्टर के पास जाएं.

30 से 40 की उम्र में करवाएं ये टेस्ट

30 से 40 की उम्र के बीच काम और ज़िम्मेदारियां कई गुना बढ़ जाती हैं और एक बार फिर हमारी सेहत नज़रअंदाज़ हो जाती हैं.
ये वो उम्र है जब आप अपनी लाइफ में कई बदलावों से गुज़रती हैं जिन्हे हैंडल करने के लिए आपका हेल्दी होना बेहद ज़रूरी है. 30 से 40 के उम्र में हर महिला को ये टेस्ट ज़रूरत करवाने चाहिए.

कंप्लीट ब्लड काउंट - हमारे देश की लाखों महिलाएं आयरन की कमी और एनीमिया से ग्रसित हैं. इस टेस्ट के माध्यम से एनीमिया, कई तरह के इंफेक्शन, कुछ प्रकार के कैंसर, और ऐसी ही कई तरह की बीमारियों को डिटेक्ट किया जा सकता है. इसलिए साल में कम से कम एक बार सीबीसी ज़रूर करवाएं

ब्लड शुगर टेस्ट- इस उम्र में डायबिटीज होने के चान्सेस कई गुना बढ़ जाते हैं. ब्लड शुगर टेस्ट में 99 और इससे कम की रीडिंग सामान्य मानी जाती है; 100 और 110 के बीच की रीडिंग का मतलब है कि आप बॉर्डर पर हैं और 110 से ज़्यादा की रीडिंग का मतलब है कि आपको डायबिटीज़ है.

लिपिड प्रोफाइल - ये टेस्ट आपके हार्ट की हेल्थ के बारे में बताता है. इस ब्लड टेस्ट के ज़रिए आपके खून में टोटल कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, एचडीएल और एलडीएल के लेवल को नापा जाता है. डायबिटीज़, हार्ट रिलेटेड बीमारियों और मोटापे से जूझ रहे लोगों को ये टेस्ट साल में एक बार ज़रूर करवाना चाहिए.

यूरिन टेस्ट - इस टेस्ट के ज़रिए यूरिन में शुगर, प्रोटीन और खून की मात्रा की जांच की जाती है जिससे किडनी की बीमारियों के अलावा धूम्रपान करने वाले लोगों में ब्लैडर कैंसर के लक्षणों के भी संकेत दे सकता है. रिपोर्ट नॉर्मल होने पर ये टेस्ट साल में एक बार ज़रूर करवाएं.

थायरॉएड टेस्ट - ये ब्लड टेस्ट अंडरएक्टिव (हाइपोथायरायडिज्म) या ओवरएक्टिव थायरॉयड (हाइपरथायरायडिज्म) का पता लगाने में मदद करते हैं. तीस से चालीस की उम्र में साल में एक बार ये टेस्ट ज़रूर करवाएं

40 से 50 की उम्र के बीच करवाएं ये टेस्ट

40 के बाद आपके शरीर में 20 और 30 वाली एनर्जी नहीं रह जाती है और ना ही उतना स्टैमिना. साथ ही शरीर में कई हॉर्मोनल बदलाव भी होते हैं और इम्यूनिटी भी कम होती है इसलिए इस उम्र में भी कुछ टेस्ट करवाने बहुत ज़रूरी हैं.

मैमोग्राम - ये वो उम्र होती है जब ब्रेस्ट कैंसर का खतरा सबसे ज़्यादा होता है इसलिए इस दौरान साल में एक बार मैमोग्राम, अल्ट्रा सोनोग्राफी या फिर क्लिनिकल ब्रेस्ट एग्ज़ामिनेशन करवाना बहुत ज़्यादा ज़रूरी हो जाता है.

बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट - महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कई गुना ज़्यादा है. ये शरीर में एस्ट्रोजेन नाम के हॉर्मोन की कमी की वजह से होता है. यही वजह है कि महिलाओं को सालाना बोन मिनरल डेंसिटी टेस्ट ज़रूर करवाना चाहिए और इस
हॉर्मोन में कमी पाए जाने पर समय रहते खानपान में बदलाव और कैल्शियम सप्लिमेंट लेना शुरू कर देना चाहिए.

ओवेरियन कैंसर (KA TEST? SOME NAME FOR THE TEST) - मेनोपॉज़ के बाद महिलाओं में ओवेरियन कैंसर का खतरा बढ़ जाता है. ये कैंसर डीएनए सेल्स में बदलाव के कारण होता है. नियमित अल्ट्रासाउंड, ट्यूमर मार्कर जैसे CA1.25,सीईए से आसानी से बीमारी की शुरुआत का पता लगा सकते हैं

 

 

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