Bihar elections: Everyone's eyes on these 'young Turks' of politics | Editorji Hindi
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बिहार चुनाव के युवा 'तुर्क'

Oct 29, 2020 16:02 IST

बिहार में इस बार के चुनाव में 31 साल के तेजस्वी यादव की रैलियों में उमड़ रही ये भीड़ वोटों में तब्दील होगी कहना मुश्किल है, लेकिन जनसमुद्र की ये तस्वीरें विपक्षियों की नींदें उड़ा रहीं हैं. तेजस्वी को इस चुनाव में युवा तुर्क कहा जा रहा है. तुर्की में 1889 में सुल्तान अब्दुल हमीद को सत्ता से बेदखल करने वाले नौजवानों को युवा तुर्क की उपाधि दी गई थी, ये साल 2020 है चुनाव बिहार सूबे के हैं. हालांकि तेजस्वी अकेले नहीं हैं जिन्हें युवा तुर्क कहा जा रहा है.

सबसे पहले बात तेजस्वी की ही करते हैं. तेजस्वी यादव क्रिकेट खेलते थे, उसी में करियर बनाना चाहते थे. झारखंड की टीम से रणजी खेला IPl तक पहुंचे भी लेकिन मैदान में खेलने का मौका नहीं मिला तब साल 2015 के विधानसभा चुनाव में एंट्री मारी और 26 साल की उम्र में सूबे के डिप्टी सीएम और 27 साल में विधानसभा में सबसे कम उम्र के विपक्ष के नेता बन गए
अब पिता जेल में हैं और इस चुनाव में तेजस्वी खुदमुख्तार हैं. उनकी रैलियों में खासी भीड़ है और आज कल इसे लेकर वो सुर्खियों में हैं. मैनिफेस्टो में वो 10 लाख नौकरियां और बेरोज़गारी भत्ते की बात कर रहे हैं.उन पर पटना से लेकर दिल्ली तक निगाहें लगी हैं


न्यू बनाम ओल्ड में अगला नाम चिराग पासवान का है. चिराग ने बॉलीवुड में किस्मत आज़माई, लेकिन कामयाबी हाथ नहीं आई तब 2014 में राजनीति का रूख किया. जमुई से लोकसभा चुनाव लड़े और जीते भी फिर 2019 में भी फिर मैदान में उतरे और फिर जीते. इस बार चिराग की पॉलिटिक्स अच्छे-अच्छे राजनीतिक विश्लेषकों की समझ से परे है. वो इस चुनाव में एनडीए से अलग होते हैं, अकेले लड़ने का फैसला करते हैं . इसी कड़ी में जेडीयू पर वो तीखा हमला करने से बाज़ नहीं आते लेकिन बीजेपी और पीएम मोदी को लेकर बेहद सॉफ्ट दिखते हैं. इस बार चिराग के पिता उनके साथ नहीं हैं उनकी 'कभी नर्म कभी गर्म' वाली पॉलिटिक्स चुनाव में कैसे नतीजे लाती है, ये देखना दिलचस्प होगा

पुष्पम प्रिया चौधरी , इन चेहरों में एक चेहरा एकदम नया तो है, लेकिन उसे लेकर बहुत चर्चा है.एक दिन अखबारों में एक एड आता है. एक नई पार्टी और एक नया सियासी चेहरा
दुनिया के सामने खुद को पेश करता है.ये चेहरा है पुष्पम का .दरभंगा से ताल्लुक रखने वाली पुष्पम प्रिया जेडीयू नेता और पू्र्व एमएलसी विनोद चौधरी की बेटी हैं. राजनीति विरासत में मिली है, दादा उमाकांत चौधरी भी राजनेता रहे हैं. पढ़ाई लिखाई के मामले में उनके पास अच्छी खासी डिग्रियां हैं, पुष्पम ने लंडन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और द इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलेपमेंट यूनिवर्सिटी से डेवलेपमेंट स्टडीज में मास्टर्स किया है. उनकी पार्टी  प्लूरल्स पार्टी का लोगो पंख लगा घोड़ा है. पुष्पम 2030 तक बिहार को यूरोप की शक्ल देना चाहती हैं, अपने मैनिफेस्टो में वो 80 लाख नौकरियां देने का वादा कर रही है साथ ही राजधर्म की बात करती हैं यानि सब का साथ सब का विकास , वो खुद कहती हैं कि नीतीश कुमार के अलावा वो किसी को फॉलो नहीं करती

इसी युवा तुर्क की भीड़ में एक चेहरा श्रेयसी सिंह का भी है, शूटर श्रेयसी सिंह को बीजेपी युवा चेहरे की तरह प्रेजेंट कर रही है. उन्होंने देश विदेश में राज्य का मान बढ़ाया है, अब उन्होंने राजनीति में एंट्री ली है. पूर्व केंद्रीय मंत्री और बिहार के दिग्गज नेता रहे स्वर्गीय दिग्विजय सिंह की बेटी श्रेयसी का अपने दम पर सियासत का ये पहला एक्जपोज़र हैं. वो जमुई से चुनाव मैदान में हैं . उनके पिता की नीतीश कुमार से सियासी तकरार रही है, उन पर निगाहें लगी हैं कि उनका सियासी सफर कैसा रहता है.

इन युवा चेहरों पर नज़रें इसलिए हैं क्योंकि बिहार की 52 फीसदी आबादी 35 साल से कम उम्र लोगों की है. वो बेरोज़गारी और दूसरे मुद्दों से जूझ रहे हैं.अब ये युवा वोटर किस पैटर्न पर वोट करते हैं ये तो देखने वाली बात होगी ही साथ ही देखना ये भी दिलचस्प होगा कि राजनीति के इन युवा तुर्कों की अपनी राजनीति किस करवट बैठेगी. इसके लिए नतीजों का इंतज़ार करना ही होगा.

एडिटरजी स्पेशल