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5G आएगा तो क्या-क्या बदल जाएगा?

Jul 22, 2021 21:23 IST | By Editorji News Desk

5जी या फिफ्थ जेनरेशन, ब्रॉडबैंड सेल्युलर नेटवर्क की वह तकनीक है जो अबतक की मौजूदा सबसे तेज सेल्युलर इंटरनेट कनेक्टिविटी यानी 4-जी को भूली बिसरी कहानी बना देगा. ठीक वैसे हा जैसे 4G ने 1G, 2G और 3G के साथ किया. अगर आप पूछेंगे कि यह 5G से फायदा क्या है तो जवाब होगा, वही फायदा जो रफ्तार का होता है. यानी सबकुछ पहले के मुकाबले जल्दी-जल्दी होगा.

5G स्पीड का असर 

  • मूवी डाउनलोड
  • रियलटाइम ट्रांसलेशन
  • स्मार्ट शहर
  • स्मार्ट घर
  • ड्राइवरलेस गाड़ियां
  • टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में रोजगार


5जी को पांच अलग-अलग तकनीकों का संगम भी कहा जा रहा है. इस Technology collaboration में मिलीमीटर वेब्स, स्मॉल सेल, मैसिव माइमो, बीमफॉर्मिंग और फुल डुप्लेक्स शामिल हैं. 

फिलहाल हमारे स्मार्टफोन 6 गीगाहर्ट्ज से नीचे की फ्रीक्वेंसी पर चलते हैं. लेकिन इंटरनेट इस्तेमाल करने वाले उपकरणों की बढ़ती संख्या के कारण यह फ्रीक्वेंसी जाम हो रही है और धीमी पड़ रही है. इसीलिए अब मिलीमीटर वेब्स के जरिए 30 से 300 गीगाहर्ट्ज के खाली फ्रीक्वेंसी बैंड को इस्तेमाल करने की तैयारी है. लेकिन वेवलेंथ काफी छोटी होने के कारण मिलीमीटर वेब्स बहुत अच्छे से ट्रैवल नहीं कर पाती हैं. आसान भाषा में कहूं तो ये पेड़ या इमारतों जैसी बाधा को पार नहीं कर पाती हैं. इसीलिए इसके साथ स्मॉल सेल तकनीक को भी मिलाया जा रहा है. 

5जी में मल्टीपल इनपुट और मल्टीपल आउटपुट कही जाने वाली तकनीक मैसिव माइमो का भी इस्तेमाल किया जा रहा है. 4जी के टावरों में एंटीनाओं के लिए करीब दर्जन भर पोर्ट्स होते हैं. मैसिव माइमो बेस्ड स्टेशनों में एंटीनाओं पर 100 से ज्यादा पोर्ट्स होंगे. लेकिन इतने ज्यादा सिग्नलों से क्रॉस कनेक्शन भी होगा, इसीलिए चौथी, बीमफॉर्मिंग तकनीक अमल में लाई जाएगी. इसके जरिए सिग्नल एक दूसरे से उलझने के बजाए पर्टिकुलर डायरेक्शन में भेजेंगे. फुल डुप्ले टेक्नोलॉजी इनकमिंग और आउटगोइंग डाटा को एक साथ हैंडल करेगी. 

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ये तो हुआ 5G का नीतिशास्त्र अब समझिए 5G का भूगोल.


अभी दुनिया के 34 देशों के 378 शहरों में ही 5जी इंटरनेट उपलब्ध है. अब ये संख्या बढ़ जाएगी क्योंकि भारत में इस साल के आखिर तक 5g टेक्नोलॉजी लाए जाने की तमाम कवायद जारी है. ग्लोबल टेलिकॉम इंडस्ट्री बॉडी का अनुमान है कि भारत में 2025 तक 92 करोड़ मोबाइल सब्सक्राइबर्स होंगे जिसमें से 8.8 करोड़ के पास 5G कनेक्शन होगा. एरिक्सन Ericsson की एक रिपोर्ट में बताया है कि भारतीय ग्राहक 5G सर्विस के लिए मौजूदा टेलीकॉम एक्सपेंस में 10% इजाफा करने को तैयार हैं Airtel और Reliance ने तो टेस्टिंग भी शुरू कर दी है. अब इंटरनेट की रफ्तार 20 से 100 गुना तेज (1000mbps तक) हो जाएगी. मतलब 

  • बड़े से बड़े डेटा को आसानी से अपलोड, डाउनलोड या ट्रांसफर किया जा सकेगा
  • अभी जो फिल्म 5-10 मिनट में डाउनलोड होती है, वो चंद सेकेंड में डाउनलोड होगी
  • वीडियो या गेम का मजा बिना किसी रुकावट HD क्वॉलिटी में लिया जा सकेगा
  • घर के सभी स्मार्ट डिवाइसेज को फोन से कनेक्ट कर बाहर से कंट्रोल कर सकेंगे
  • एक साथ कई यूजर्स जुड़ने पर भी इंटरनेट की रफ्तार कम नहीं होगी
  • कंप्यूटर या लैपटॉप से किए जाने वाले काम मोबाइल से भी किए जा सकेंगे
  • तेज रफ्तार इंटरनेट से रोबोट, ड्रोन और ऑटोमैटिक वाहनों का संचालन आसान होगा
  • ये तो हुए 5G के साधारण फायदे अब इसके अर्थशास्त्र के तहत समझिए किस सेक्टर को कितना ग्रोथ मिल सकते है. 

किस इंडस्ट्री को कितना फायदा 

  • मैन्युफैक्चरिंग - 20%
  • रिटेल - 12%
  • आईटी - 11%
  • एग्रीकल्चर - 11%
  • डिफेंस - 10%


5जी के जरिए न सिर्फ अभी की तरह लोग आपस में जुड़े होंगे बल्कि डिवाइसेज और मशीनें भी आपस में कनेक्ट होंगी और आपस में लगभग रियल टाइम में संवाद कर सकेंगी. इतना बड़ी क्रांति आएगी तो अपने साथ रोजगार के मौके भी लाएगी. समझिए किस सेक्टर में कितना रोजगार पैदा होगा.

Xpheno की रिपोर्ट बताती है भारत में 5G शुरू करने के लिए करीब 1.5 लाख से ज्यादा लोगों की जरूरत पड़ेगी

कुल वैकेंसी का 30% अकेले Cisco ने जारी किया

स्वीडन की फर्म Ericsson 20% वैकेंसी पर हिस्सेदारी दिखा रही है


इस नेचर की होगी जॉब वैकेंसी

  • ट्रांसमिशन स्टेशन इंजीनियर 
  • ड्राइव टेस्ट इंजीनियर 
  • मेंटेनेंस इंजीनियर 
  • सर्किट डिजाइनर
  • स्ट्रैटजिक मास डेवलपर 
  • नेटवर्क इंजीनियर 
  • प्रॉडक्ट डिजाइनर
  • डेटाबेस डेवलपर

अब 5जी तकनीक के साथ एक नए तरह की वायरलेस कनेक्टिविटी का समय शुरू होने जा रहा है जिसकी स्पीड इतनी होगी कि घटनाओं के घटने और उनकी सूचना पहुंचने के बीच लगने वाला समय यानी लेटेंसी न के बराबर होगी. 

 

 

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