इस बार उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव, कोविड के मंडराते खतरे के बीच आयोजित हो रहे हैं. इसी वजह से रैलियों पर, मीटिंग्स पर पाबंदी रहेगी. चुनावों के इस मौसम में, वर्चुअल और डिजिटल कैंपेन वास्तविकता का रूप लेते नजर आएंगे.
UP's digital dangal: बीजेपी को बढ़त?
और बात जब टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल फायदे के लिए करने की आती है, तो बीजेपी साफ तौर पर दूसरे दलों से एक कदम आगे नजर आती है.
यूपी के रणक्षेत्र में बीजेपी ने किस तरह से अपने तकनीकी धुरंधरों को तैयार करना शुरू कर दिया है, आइए जानते हैं:
WhatsUP, BJP: वॉट्सऐप के 1 लाख ग्रुप
बीजेपी का बड़ा फोकस वॉट्सऐप पर है. पार्टी ने एक लाख से भी ज्यादा वॉट्सऐप ग्रुप इसलिए बनाए हैं, ताकि बूथ स्तर पर वोटर्स को एकजुट किया जा सके.
बीजेपी के 9 हजार सोशल मीडिया धुरंधरों के लिए ट्रेनिंग सेशन
बीजेपी नेताओं के हवाले से रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पार्टी पहले ही अपने 9 हजार से ज्यादा सोशल मीडिया पदाधिकारियों के लिए कम से कम 85 मीटिंग और वर्कशॉप का आयोजन कर चुकी है.
अब वह डिजिटल रूप से कॉन्टेंट के प्रचार को और तेज करने की योजना पर काम कर रही है.
अलग-अलग जिलों पर केंद्रित 100 से भी ज्यादा फेसबुक पेज
अलग-अलग जिलों में पहुंच के लिए 100 से भी ज्यादा फेसबुक पेज तैयार किए गए हैं.
खास जातियों के लिए बीजेपी का वॉट्सऐप ग्रुप
कुर्मी, कोइरी, कश्यप, बुनकर, गुर्जर, आदि ओबीसी जातियों को अपने पक्ष में लामबंद करने के लिए पार्टी ने खास वॉट्सऐप ग्रुप बनाए हैं.
बूथ वर्कर का वोटर से सीधा जुड़ाव
बूथ लेवल पर पार्टी नेताओं को उन्हें सौंपे गए मतदाताओं (वोटर लिस्ट) से संपर्क में रहने की ट्रेनिंग दी गई है, इसमें बड़ी संख्या सरकार की आवास, गैस कनेक्शन, शौचालय, पीने के पानी और बिजली योजना के लाभार्थियों की है.
वर्चुअल रैलियों के लिए वर्कर्स को ट्रेनिंग दी गई
प्रमुख नेताओं के भाषण की लाइव स्ट्रीमिंग को लेकर भी कार्यकर्ताओं को ट्रेनिंग दी गई है.
डिजिटल रैलियों के दौरान छोटी छोटी सभाओं को आयोजित करने के लिए भी ट्रेनिंग सेशन दिए गए हैं.
3D तकनीक का इस्तेमाल
बीजेपी, वर्चुअल रैलियों के लिए 3डी टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल की योजना भी बना रही है.
दो अलग-अलग जगहों पर मौजूद नेताओं को एक साथ दिखाने के लिए 3D स्टूडियो मिक्स तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा.
ग्रामीण इलाकों में घूमेंगे LED स्क्रीन वाले ट्रक
प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बीजेपी के प्रचार की आम रणनीति के अलावा, पार्टी पूरे राज्य में, खासतौर से ग्रामीण इलाकों में LED स्क्रीन वाले वैन और ट्रक भी चला रही है.
BJP: टेक ट्रेंडसेटर
चुनाव प्रचार में तकनीक का इस्तेमाल करने में बीजेपी अग्रणी रही है - चाहे वह 2004 के चुनाव में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का प्री-रिकॉर्डेड कॉल रहा हो या 2014 में 3डी वैन टेक्नोलॉजी या मिस्ड कॉल प्रयोग. पार्टी ने टेक्नोलॉजी पर ट्रेंड सेट किए हैं.
UP's digital dangal: देखादेखी के रास्ते पर सपा, कांग्रेस
तकनीक के इस मैदान में दूसरी पार्टियां देखादेखी के नियम पर चलती दिखाई दे रही हैं. समाजवादी पार्टी वर्चुअल रैलियों की योजना बना रही है, ताकि वह वोटर्स तक पहुंच बढ़ा सके. अखिलेश यादव की पार्टी इसके लिए सोशल मीडिया पर निर्भर है लेकिन समस्या ये है कि पार्टी का कोर वोटर ग्रामीण क्षेत्र से है.
SP भी तेज कर रही है डिजिटल और सोशल मीडिया की रणनीति
अपनी डिजिटल रणनीति को आगे बढ़ाने के लिए, समाजवादी पार्टी ने लोगों को वॉट्सऐप ग्रुप से जोड़ना शुरू कर दिया है. साथ ही, पार्टी ने कार्यकर्ताओं से कहा है कि वह दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर मतदाताओं के साथ जुड़ें.
प्रियंका ने लॉन्च किया वर्चुअल कैंपेन
कांग्रेस की प्रियंका गांधी भी जनता से डिजिटली कनेक्ट होने की कोशिश कर रही हैं. प्रियंका ने अपना वर्चुअल कैंपेन उसी वक्त शुरू किया जब चुनाव आयोग ने राज्य में इलेक्शन शेड्यूल का ऐलान किया. पार्टी अपने नेताओं के रोचक ऑनलाइन सेशन और लाइव आयोजित करने की योजना पर काम कर रही है.
दूसरी पार्टियां जब देखादेखी करती दिखाई दे रही हैं, वे यूपी चुनाव में बीजेपी की तकनीक और डिजिटल प्रचार स्ट्रैटिजी से पीछे ही दिखाई दे रही हैं.